Behind The Idol : बप्पा की मूर्ति में एक दांत टूटा हुआ क्यों होता है? जानिए इसके पीछे छिपी वो रहस्यमयी जंग
News India Live, Digital Desk : हम जब भी भगवान गणेश (Lord Ganesha) की मूर्ति या तस्वीर देखते हैं, तो एक चीज़ हमारा ध्यान जरूर खींचती है। उनका एक दांत पूरा होता है और दूसरा टूटा हुआ। इसी वजह से उन्हें 'एकदंत' भी कहा जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के विघ्नहर्ता का अपना दांत कैसे टूट गया? क्या यह कोई दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई गहरा राज है? पुराणों में वैसे तो कई कहानियां मिलती हैं (जैसे परशुराम जी वाली कथा), लेकिन एक कहानी ऐसी है जो बहुत कम लोग जानते हैं, और यह कहानी जुड़ी है एक भयानक राक्षस 'गजमुखासुर' (Gajamukhasura) से।
आइए, आसान शब्दों में जानते हैं यह रोमांचक पौराणिक कथा।
कौन था गजमुखासुर और उसकी क्या जिद थी?
बहुत समय पहले की बात है, गजमुखासुर नाम का एक बेहद शक्तिशाली असुर था। जैसा कि अक्सर असुरों के साथ होता है, उसने भी भगवान शिव (Lord Shiva) को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या इतनी जबरदस्त थी कि भोलेनाथ प्रकट हो गए।
गजमुखासुर ने वरदान मांगा— "मुझे ऐसा शरीर मिले जिसे किसी भी अस्त्र-शस्त्र (Weapon) से काटा या मारा न जा सके।" वरदान मिलते ही उस असुर का दिमाग फिर गया। उसने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया और देवताओं से लेकर इंसानों तक, सबका जीना हराम कर दिया।
मैदान-ए-जंग में बप्पा की एंट्री
जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो सारे देवता मदद मांगने भगवान गणेश के पास पहुंचे। गणेश जी ने हमेशा की तरह देवताओं को आश्वासन दिया और उस असुर से युद्ध करने निकल पड़े।
लड़ाई बड़ी भीषण थी। गजमुखासुर अपनी मायावी शक्तियों का इस्तेमाल कर रहा था। भगवान गणेश ने उस पर कई दिव्य अस्त्र चलाए, लेकिन शिवजी के वरदान के कारण उन हथियारों का उस असुर पर कोई असर नहीं हो रहा था। तलवारें टूट रही थीं, बाण मुड़ रहे थे।
जब असुर बन गया 'चूहा' (The Transformation)
लड़ते-लड़ते गजमुखासुर को समझ आ गया कि गणेश जी को हराना नामुमकिन है, लेकिन वरदान के कारण वह मर भी नहीं रहा था। बचने के लिए उसने एक चाल चली। उसने अपनी माया से खुद को एक छोटे लेकिन बहुत फुर्तीले चूहे (Mouse/Mushak) में बदल लिया और गणेश जी पर हमला करने दौड़ा।
अब समस्या यह थी कि इतने छोटे चूहे पर भारी-भरकम हथियार कैसे चलाएं? और हथियार उस पर असर भी नहीं कर रहे थे।
गणेश जी का मास्टरस्ट्रोक: 'एकदंत' का जन्म
जब सारे विकल्प खत्म हो गए, तो भगवान गणेश को बहुत क्रोध आया। उन्हें समझ आ गया कि इस "अजेय" असुर को हराने के लिए किसी बाहरी हथियार की नहीं, बल्कि अपने ही अंश की जरूरत है।
उन्होंने बिना एक पल की देरी किए, अपने दाहिने दांत (Tusk) को जड़ से उखाड़ लिया! जी हां, उन्होंने खुद को तकलीफ देकर अपना दांत तोड़ा। जैसे ही उन्होंने वह दांत उस मायावी चूहे (गजमुखासुर) पर फेंका, वह एक दिव्य अस्त्र में बदल गया।
असुर घबरा गया। उसे समझ आ गया कि अब उसका अंत निश्चित है। वह डर के मारे कांपने लगा और गणेश जी के पैरों में गिर पड़ा। उसने माफी मांगी।
दुश्मन बना सवारी
गणेश जी 'दयानिधि' भी हैं। उन्होंने उसका वध करने के बजाय उसे माफ कर दिया, लेकिन एक शर्त पर—उसे अब अपनी दुष्टता छोड़कर हमेशा गणेश जी की सेवा करनी होगी। गणेश जी ने उस चूहे (मूषक) रूपी असुर को अपना वाहन (Vehicle) बना लिया।
बस तभी से, भगवान गणेश का एक दांत टूटा हुआ रह गया और वह दुनिया में "एकदंत" के नाम से पूजे जाने लगे। और वह अभिमानी असुर उनका विनम्र सेवक "मूषकराज" बन गया।
जीवन की सीख (Life Lesson)
यह कथा हमें सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, सही समय पर बुद्धि और त्याग (Sacrifice) से उसे काबू किया जा सकता है। गणेश जी ने अपना दांत खोया, लेकिन दुनिया को बुराई से बचाया।
अगली बार जब आप बप्पा की आरती करें, तो उनके टूटे दांत को देखकर इस महान त्याग को याद जरूर कीजिएगा।