BCCI का विराट-रोहित को कड़ा संदेश अगर टीम इंडिया में रहना है, तो घरेलू क्रिकेट खेलना होगा
News India Live, Digital Desk: भारतीय क्रिकेट की दुनिया से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने दिग्गजों से लेकर फैंस तक, सबको चौंका दिया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के दो सबसे बड़े सुपरस्टारों, विराट कोहली और रोहित शर्मा, समेत सभी सीनियर खिलाड़ियों को एक सख्त और सीधा संदेश भेजा है. संदेश साफ है - "अगर आपको भारतीय टीम में अपनी जगह बनाए रखनी है, तो आपको घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेना होगा."
यह पहली बार है जब BCCI ने इतने बड़े खिलाड़ियों को लेकर इतना कड़ा रुख अपनाया है. यह फैसला सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की भविष्य की दिशा को तय करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
क्यों पड़ी BCCI को यह कदम उठाने की जरूरत?
इस बड़े फैसले के पीछे कुछ ठोस वजहें हैं. पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि कई सीनियर खिलाड़ी या तो चोट का हवाला देकर या फिर 'वर्कलोड मैनेजमेंट' के नाम पर घरेलू टूर्नामेंट्स जैसे रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में हिस्सा नहीं ले रहे थे. वे सीधे IPL और अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही खेलते हुए नजर आ रहे थे.
इसकी सबसे बड़ी मिसाल ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के रूप में देखने को मिली, जिन्हें घरेलू क्रिकेट न खेलने की वजह से अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से हाथ धोना पड़ा था. BCCI का मानना है कि:
- घरेलू क्रिकेट ही असली बुनियाद है: टीम में जगह किसी भी खिलाड़ी के लिए 'टेकन फॉर ग्रांटेड' नहीं होनी चाहिए. घरेलू क्रिकेट में खेलकर ही एक खिलाड़ी अपनी फॉर्म, फिटनेस और मैच प्रैक्टिस को साबित कर सकता है.
- युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा: जब विराट और रोहित जैसे दिग्गज रणजी ट्रॉफी में खेलते हैं, तो यह न सिर्फ उस टूर्नामेंट का मान बढ़ाता है, बल्कि ड्रेसिंग रूम में युवा खिलाड़ियों को उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है.
- फॉर्म और फिटनेस का पैमाना: सिर्फ नेट्स में प्रैक्टिस करना और असली मैच में खेलने में जमीन-आसमान का फर्क होता है. घरेलू क्रिकेट चयनकर्ताओं को यह देखने का मौका देता है कि खिलाड़ी असल मैच की परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं.
क्या अब रणजी में खेलते दिखेंगे कोहली और रोहित?
BCCI सचिव जय शाह इस नियम को लेकर काफी गंभीर हैं. इसका मतलब है कि जब भी रोहित शर्मा और विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ब्रेक पर होंगे, तो उनसे यह उम्मीद की जाएगी कि वे अपनी-अपनी घरेलू टीमों (मुंबई और दिल्ली) के लिए उपलब्ध रहें.
यह फैसला भारतीय क्रिकेट में एक नए दौर की शुरुआत है, जहाँ नाम से ज्यादा काम और प्रदर्शन को तवज्जो दी जाएगी. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम इंडिया के 'किंग' और 'हिटमैन' इस नए नियम पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं. लेकिन एक बात तो तय है - अब टीम इंडिया की नीली जर्सी का रास्ता घरेलू क्रिकेट के मैदानों से होकर ही गुजरेगा.