Bank FD Rates 2026: क्या फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश का है यह सही समय? जानें SBI, HDFC और PNB सहित प्रमुख बैंकों की ताजा ब्याज दरें

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए मार्च 2026 का यह अंतिम सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। देश में महंगाई दर 2% के करीब और जीडीपी विकास दर 7.4% के मजबूत स्तर पर होने से बाजार में स्थिरता का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन सकती है, इसलिए निवेशकों के पास मौजूदा उच्च दरों को लॉक करने का यह एक शानदार अवसर है।

सरकारी बैंकों का हाल: सुरक्षा के साथ सम्मानजनक रिटर्न

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस समय अपनी चुनिंदा अवधियों पर आकर्षक दरें दे रहे हैं।

ब्याज दरें: सामान्य ग्राहकों के लिए दरें 6.4% से 6.6% के बीच हैं।

वरिष्ठ नागरिक: बुजुर्गों को हमेशा की तरह 0.45% से 0.70% तक का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।

स्पेशल एफडी: कई सरकारी बैंक 390 दिन, 444 दिन और 800 दिन जैसी विशेष अवधि वाली स्कीम्स चला रहे हैं, जहाँ सामान्य एफडी के मुकाबले 0.25% तक अधिक ब्याज मिल रहा है।

प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंक: यहाँ मिल रहा है सबसे ज्यादा मुनाफा

निजी क्षेत्र के दिग्गज जैसे HDFC और ICICI बैंक 18 महीने से 3 साल की अवधि के लिए 6.5% से 6.9% तक ब्याज दे रहे हैं। वहीं, अगर आप थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं, तो स्मॉल फाइनेंस बैंक आपके लिए 'मुनाफे की खान' साबित हो सकते हैं।

स्मॉल फाइनेंस बैंक: यूनिटी और सूर्योदय जैसे बैंक कुछ विशेष स्कीमों पर 8% से अधिक का ब्याज ऑफर कर रहे हैं।

सुरक्षा: याद रखें कि DICGC के नियमों के तहत हर बैंक में आपकी ₹5 लाख तक की जमा राशि (मूलधन + ब्याज) पूरी तरह सुरक्षित और बीमित होती है।

टैक्स और पेनल्टी: निवेश से पहले जान लें ये जरूरी नियम

एफडी में पैसा लगाने से पहले इन तकनीकी पहलुओं को समझना जरूरी है ताकि बाद में पछताना न पड़े:

TDS का गणित: यदि आपका सालाना ब्याज ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक है, तो बैंक टीडीएस काटेगा। इससे बचने के लिए पात्र व्यक्ति Form 15G/15H जरूर जमा करें।

प्री-मैच्योर विड्रॉल: यदि आप अवधि पूरी होने से पहले पैसे निकालते हैं, तो बैंक आमतौर पर 0.5% से 1% तक की पेनल्टी लगाता है।

नॉन-कॉलेबल एफडी: कुछ बैंक अधिक ब्याज के बदले 'नॉन-कॉलेबल' एफडी देते हैं, जिसे आप मैच्योरिटी से पहले किसी भी हाल में नहीं तोड़ सकते।

अमर उजाला की विशेष सलाह: अपनाएं 'लैडरिंग' तकनीक

अक्सर निवेशक सारा पैसा एक ही एफडी में लंबे समय के लिए ब्लॉक कर देते हैं। हमारी सलाह है कि आप 'एफडी लैडरिंग' अपनाएं। अपनी कुल राशि को तीन हिस्सों में बांटें और उन्हें 1 साल, 2 साल और 3 साल की अवधि के लिए अलग-अलग जमा करें। इससे आपको हर साल नकदी (Liquidity) भी मिलेगी और आप बदलती ब्याज दरों का लाभ भी उठा सकेंगे।