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April 12 2026 09:53 am

शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा बांग्लादेश, भारत दौरे से पहले ढाका ने रख दी बड़ी मांग बढ़ सकती है टेंशन

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 News India Live, Digital Desk: भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने आगामी उच्च स्तरीय भारत दौरे से पहले एक बड़ा बयान जारी कर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को तेज कर दिया है। ढाका की ओर से साफ कहा गया है कि शेख हसीना को वापस सौंपना उनके न्याय तंत्र के लिए अनिवार्य है। इस मांग के बाद अब सबकी निगाहें नई दिल्ली पर टिकी हैं कि भारत अपने इस पुराने और भरोसेमंद सहयोगी देश की पूर्व नेता को लेकर क्या रुख अपनाता है।

विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख: क्या है ढाका का प्लान?

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम सरकार लगातार शेख हसीना पर दर्ज मुकदमों को लेकर सख्त नजर आ रही है। हाल ही में बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि भारत के साथ होने वाली आगामी द्विपक्षीय वार्ताओं में शेख हसीना की वापसी का मुद्दा प्राथमिकता पर रहेगा। बांग्लादेश का तर्क है कि हसीना के खिलाफ देश में मानवता के खिलाफ अपराध और भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामले लंबित हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच के लिए उनका देश में होना जरूरी है।

भारत के लिए बढ़ी कूटनीतिक चुनौती

शेख हसीना वर्तमान में भारत में एक सुरक्षित स्थान पर रह रही हैं। भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। एक तरफ भारत के बांग्लादेश की जनता के साथ गहरे संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ शेख हसीना भारत की लंबे समय तक विश्वसनीय सहयोगी रही हैं। प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) के तहत ढाका अपनी मांग रख रहा है, लेकिन भारत को अपने सामरिक हितों और अंतरराष्ट्रीय छवि के बीच संतुलन बनाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मांग को पूरा करना भारत के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है।

क्या प्रत्यर्पण संधि के तहत होगी वापसी?

भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में एक प्रत्यर्पण संधि हुई थी, जिसे 2016 में संशोधित किया गया था। इस संधि के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति पर राजनीतिक प्रकृति के अपराध हैं, तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। हालांकि, हत्या और गंभीर अपराधों को इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। बांग्लादेश इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर शेख हसीना को घेरने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह है कि आगामी बैठक में भारतीय कूटनीतिज्ञ इस दबाव को कैसे संभालते हैं।