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April 18 2026 04:39 am

Bahuchara Mata : आखिर क्यों इस मंदिर में उमड़ती है किन्नरों की भारी भीड़? जानें गुजरात के इस शक्तिपीठ की रहस्यमयी कथा

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News India Live, Digital Desk: गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित बहुचरा माता मंदिर (Bahuchara Mata Mandir) न केवल एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र भी है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किन्नरों की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं और चमत्कारों से भरा यह मंदिर भक्तों के बीच अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान रखता है।

शक्तिपीठों में से एक: जहाँ गिरा था माता सती का हाथ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुचरा माता का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के टुकड़े किए थे, तब यहाँ माता का बायां हाथ गिरा था। इसी कारण इस स्थान को अत्यंत पवित्र और सिद्ध माना जाता है। यहाँ माता मुर्गे की सवारी करती हैं, जो वीरता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।

किन्नरों की कुलदेवी होने के पीछे की पौराणिक कथा

बहुचरा माता को किन्नरों (Transgenders) की आराध्य देवी मानने के पीछे कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। एक प्रमुख कथा के अनुसार:

एक राजा की कोई संतान नहीं थी। माता की कृपा से उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, लेकिन वह बालक नपुंसक निकला।

माता बहुचरा ने उस बालक को दर्शन दिए और उसे खुद को समर्पित करने की प्रेरणा दी।

तब से किन्नर समाज माता को अपनी कुलदेवी मानता है। मान्यता है कि जो भी किन्नर यहाँ आकर माता की सेवा करता है, अगले जन्म में उसे पूर्ण शरीर प्राप्त होता है।

चमत्कारी मंदिर और मन्नतें

बहुचरा माता को 'निःसंतानों का सहारा' भी कहा जाता है। दूर-दूर से विवाहित जोड़े यहाँ संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने आते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहाँ चांदी का मुर्गा चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर की वास्तुकला और वहां की शांति भक्तों को एक अनोखा अनुभव प्रदान करती है। यहाँ होने वाली विशेष पूजा और अनुष्ठानों में किन्नर समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जो इस मंदिर को दुनिया के अन्य मंदिरों से अलग बनाता है।

सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

यह मंदिर केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। यहाँ समाज का हर वर्ग, विशेषकर वह वर्ग जिसे अक्सर मुख्यधारा से अलग समझा जाता है, समान अधिकार के साथ पूजा करता है। नवरात्रि के दौरान यहाँ का नजारा देखने लायक होता है, जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए उमड़ते हैं।