बीजेपी में आकर भी नहीं बच पाए बाहुबली? पुरानी फाइल खुलते ही राजस्थान की राजनीति में आया भूचाल

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान की राजनीति, खासकर आदिवासी बेल्ट (वागड़) में इन दिनों जो खिचड़ी पक रही है, उसने जयपुर से लेकर दिल्ली तक सबको चौंका दिया है। हम बात कर रहे हैं बांसवाड़ा के कद्दावर नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय (Mahendrajit Singh Malviya) की।

अभी कुछ ही महीने पहले की बात है, जब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मालवीय ने कांग्रेस का वर्षों पुराना साथ छोड़कर बीजेपी (BJP) का दामन थाम लिया था। तब कहा गया था कि वे "मोदी की गारंटी" और विकास से प्रभावित हैं। लेकिन, दबी जुबान में चर्चा यह भी थी कि उन पर ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) का दबाव था, और उन्हें लगा कि सत्ताधारी पार्टी (बीजेपी) में जाने से वे 'सेफ' हो जाएंगे। जिसे आम भाषा में लोग "बीजेपी की वाशिंग मशीन" कहते हैं।

लेकिन, अब जो खबरें आ रही हैं, वो बताती हैं कि शायद "प्लान उल्टा पड़ गया है"।

सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा, आखिर माजरा क्या है?

पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फ़ैल रही है— "महेंद्रजीत सिंह मालवीय बीजेपी छोड़ रहे हैं।" हालाँकि, अभी तक उन्होंने खुद आकर इसका ऐलान नहीं किया है, लेकिन कहते हैं न कि बिना चिंगारी के धुआँ नहीं उठता।

अंदर की खबर यह है कि मालवीय बीजेपी में 'असहज' महसूस कर रहे हैं। जिस सुरक्षा की उम्मीद लेकर वो आए थे, वो उन्हें मिल नहीं रही। उल्टा खबर तो यह भी है कि एसीबी (ACB) ने पुरानी फाइलों पर धूल झाड़ना शुरू कर दिया है। वही पुरानी जांच, जिसकी वजह से उनकी नींद उड़ी हुई थी, अब फिर से उनके दरवाजे पर दस्तक दे रही है।

'माया मिली न राम' वाली हालत?

मालवीय का बीजेपी में जाना एक जुआ था।

  1. पहला झटका: वे कांग्रेस छोड़कर आए, बीजेपी से लोकसभा का टिकट मिला, लेकिन मोदी लहर होने के बावजूद वे चुनाव हार गए।
  2. दूसरा झटका: हारने के बाद पार्टी में उनका कद वैसा नहीं रहा जैसा कांग्रेस में मंत्री रहते हुए था।
  3. तीसरा और सबसे बड़ा झटका: अब खबर है कि सरकारी एजेंसियां उन पर नरम नहीं पड़ी हैं।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगर सत्ता में रहने के बावजूद उन पर जांच का शिकंजा कसा जा रहा है, तो फिर बीजेपी में रहने का फायदा ही क्या? इसी बौखलाहट में उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज़ हो गई हैं।

क्या फिर होगी 'घर वापसी'?

अब सवाल यह है कि वो जाएंगे कहां? क्या कांग्रेस उन्हें वापस लेगी? जब वे गए थे, तो कांग्रेस ने उन्हें 'गद्दार' तक कह दिया था। लेकिन राजनीति में परमानेंट दुश्मन कोई नहीं होता। अगर मालवीय बीजेपी छोड़ते हैं, तो यह राजस्थान बीजेपी के लिए, खासकर भजनलाल सरकार के लिए एक बड़ा झटका होगा क्योंकि इससे आदिवासी वोट बैंक पर असर पड़ेगा।

हमारा टेक (Take):
महेंद्रजीत सिंह मालवीय का यह एपिसोड बाकी नेताओं के लिए एक सबक है। यह बताता है कि सिर्फ पार्टी बदल लेने से आप क़ानून या जांच से ऊपर नहीं हो जाते। फिलहाल वागड़ का यह 'शेर' खुद को जाल में फंसा हुआ महसूस कर रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अगला कदम क्या उठाते हैं सफाई देते हैं या सच में इस्तीफा?