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April 10 2026 07:10 am

Bada Mangal 2026: इस बार 4 नहीं, पूरे 8 बुढ़वा मंगल पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा जानें क्यों है यह बेहद खास संयोग

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत पूरे उत्तर भारत में 'बड़ा मंगल' का विशेष महत्व है। लेकिन साल 2026 का ज्येष्ठ माह (Jyeshtha Month) भक्तों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आ रहा है। इस साल ज्येष्ठ के महीने में लगने वाले 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' की संख्या को लेकर एक अद्भुत संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ के महीने में 4 नहीं बल्कि पूरे 8 बड़ा मंगल पड़ेंगे। यह दुर्लभ संयोग 'अधिकमास' (Adhikmaas) के कारण बन रहा है, जिससे हनुमान भक्तों को बजरंगबली की आराधना के लिए दोगुना समय मिलेगा।

क्यों पड़ रहे हैं 8 बड़ा मंगल? अधिकमास का अद्भुत गणित

आमतौर पर ज्येष्ठ के महीने में चार या पांच मंगलवार आते हैं जिन्हें 'बड़ा मंगल' कहा जाता है। लेकिन साल 2026 में हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह में अधिकमास लग रहा है। जब भी किसी महीने का अधिकमास होता है, तो उस महीने के दिनों की संख्या बढ़ जाती है। इस वजह से 2026 में ज्येष्ठ मास दो हिस्सों में विभाजित होगा—प्रथम ज्येष्ठ और द्वितीय ज्येष्ठ। इन दोनों महीनों को मिलाकर कुल 8 मंगलवार आएंगे, जिन्हें 'बड़ा मंगल' के रूप में मनाया जाएगा। भक्तों के लिए यह हनुमान जी की विशेष कृपा पाने का एक महाकुंभ जैसा होगा।

बड़ा मंगल 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां (Dates)

भक्तों की सुविधा के लिए यहाँ 8 बड़ा मंगल की संभावित तिथियां दी जा रही हैं:

प्रथम ज्येष्ठ मंगल: 5 मई, 12 मई, 19 मई और 26 मई।

द्वितीय (अधिकमास) ज्येष्ठ मंगल: 2 जून, 9 जून, 16 जून और 23 जून।

पूजा विधि और महत्व: कैसे करें बजरंगबली को प्रसन्न?

'बुढ़वा मंगल' के दिन हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भीम का घमंड चूर करने के लिए हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धरा था।

स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र धारण करें।

चोला और सिंदूर: हनुमान जी को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर अर्पित करें (चोला चढ़ाएं)।

भोग: बड़ा मंगल पर बूंदी के लड्डू, हलवा या मीठा पूड़ा का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

सुंदरकांड का पाठ: इस दिन सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी मंगल दोष और संकट दूर होते हैं।

भंडारा: लखनऊ की परंपरा के अनुसार, इस दिन जगह-जगह प्याऊ और भंडारे आयोजित कर गरीबों को भोजन कराना पुण्य फलदायी होता है।

बड़ा मंगल का ऐतिहासिक महत्व

बड़ा मंगल की शुरुआत अवध के नवाबों के काल से मानी जाती है। कहा जाता है कि नवाब वाजिद अली शाह की बेगम ने पुराने लखनऊ के हनुमान मंदिर में मन्नत मांगी थी, जो पूरी होने पर उन्होंने भव्य उत्सव आयोजित किया था। तब से यह त्यौहार सांप्रदायिक सौहार्द और श्रद्धा का प्रतीक बन गया है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलजुल कर सेवा कार्य करते हैं।