Fake Degree Scam : SIT के रडार पर आगरा यूनिवर्सिटी के बाबू फर्जी डिग्री मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी, कई कर्मचारी नपेंगे
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के चर्चित आगरा डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हुए फर्जी डिग्री मामले की जांच अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। एसआईटी (SIT) की जांच में विश्वविद्यालय के कई बाबू (क्लर्क) और कर्मचारियों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले हैं। शासन से हरी झंडी मिलते ही इन कर्मचारियों पर गिरफ्तारी और निलंबन की गाज गिरना तय माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? (The Background)
यह मामला बीएड (B.Ed.) और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज की फर्जी डिग्री जारी करने से जुड़ा है। आरोप है कि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड रूम में तैनात कुछ कर्मचारियों ने मिलीभगत कर बैक डेट में फर्जी डिग्रियां तैयार कीं और उन्हें सत्यापित (Verify) भी कर दिया।
SIT की जांच: विशेष जांच दल (SIT) पिछले काफी समय से डिजिटल और फिजिकल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही थी।
पेंसिलों का खेल: जांच में सामने आया कि चार्ट और रिजल्ट रजिस्टर में मूल नंबरों को हटाकर पेंसिल या दूसरी स्याही से नंबर चढ़ाए गए थे, ताकि अयोग्य छात्रों को पास दिखाया जा सके।
रडार पर आए कर्मचारियों की भूमिका
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उन बाबुओं को चिह्नित किया है जो रिकॉर्ड रूम, डिग्री अनुभाग और चार्ट रूम में तैनात थे।
डाटा फीडिंग में गड़बड़ी: प्राइवेट एजेंसियों के साथ मिलकर पोर्टल पर गलत डाटा अपलोड किया गया।
मिलीभगत: विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में फर्जीवाड़ा संभव नहीं था।
लाखों का खेल: एक-एक डिग्री के लिए छात्रों से मोटी रकम वसूली गई थी।
अगला कदम: बड़ी कार्रवाई की तैयारी
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी पूरक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
निलंबन और एफआईआर: चिह्नित किए गए आधा दर्जन से अधिक बाबुओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
डिग्रियां होंगी रद्द: इस फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मियों की डिग्रियां भी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होगी।