भारत के पीछे हटते ही चीन ने कर दिया बड़ा खेल, रूस और ईरान से कौड़ियों के दाम खरीद रहा तेल स्टोरेज भी पड़ी कम
News India Live, Digital Desk : वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों और रणनीतिक संतुलन के चलते भारत ने रूस और ईरान से कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद में भारी कटौती की है। भारत के इस 'स्टेप-बैक' का सीधा फायदा अब चीन उठा रहा है। चीन ने इस मौके को लपकते हुए रूस और ईरान से भारी डिस्काउंट पर तेल खरीदना शुरू कर दिया है, जिससे उसकी तिजोरी को मोटा मुनाफा हो रहा है।
भारत ने क्यों कम की तेल की खरीद?
ब्लूमबर्ग की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी के मुकाबले फरवरी में रूस से भारत की तेल खरीद में करीब 40 फीसदी की गिरावट आने की उम्मीद है।
अमेरिकी दबाव और ट्रेड डील: भारत ने अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूस और ईरान से दूरी बनाना शुरू किया है।
पेमेंट और प्रतिबंध: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी जटिलताओं ने भी भारत को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया।
चीन की 'प्रॉफिट बुकिंग': $12 प्रति बैरल में मिल रहा रूसी तेल
भारत के हटने के बाद रूस और ईरान के लिए चीन ही सबसे बड़ा खरीदार बचा है। इस मजबूरी का फायदा उठाते हुए चीन ने भारी सौदेबाजी की है।
भारी डिस्काउंट: रूस अब चीन को महज 12 डॉलर प्रति बैरल की दर से तेल बेच रहा है। पिछले महीने की तुलना में कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल तक की बड़ी गिरावट आई है।
ईरानी तेल का खेल: ईरानी 'लाइट क्रूड' भी चीन को 11 डॉलर के आसपास मिल रहा है।
स्टोरेज फुल, रखने की जगह नहीं बची!
चीन इस समय "डिस्काउंटेड तेल" से अपनी प्यास बुझाने में लगा है। हालात यह हैं कि चीन ने अपनी पूरी रिफाइनिंग क्षमता के बराबर तेल खरीद लिया है।
रिकॉर्ड आयात: फरवरी के पहले 18 दिनों में रूस से चीन का तेल निर्यात प्रतिदिन 2 मिलियन बैरल बढ़ गया है, जो जनवरी से 20 फीसदी और दिसंबर से 50 फीसदी अधिक है।
कहाँ रख रहा तेल: चीन अब अपने देश के अंदर और बाहर बनी सभी स्टोरेज फैसिलिटीज (टीपॉट्स और अन्य डिपो) को फुल कर चुका है। विश्लेषकों का कहना है कि अब उसके पास नया तेल रखने के लिए जगह की कमी पड़ने लगी है।
ईरान से ज्यादा रूस पर भरोसा क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि चीन ने अब ईरान के मुकाबले रूस से तेल खरीदना अधिक सुरक्षित मान लिया है।
ईरान पर हमले का डर: चीन को डर है कि अमेरिका कभी भी ईरान की तेल सुविधाओं (Oil Facilities) पर हमला कर सकता है, जिससे सप्लाई बाधित हो सकती है।
रूस के साथ कम जोखिम: यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस से तेल की आपूर्ति फिलहाल चीन के लिए अधिक स्थिर और सुरक्षित है। यही कारण है कि चीन ने पिछले साल की तुलना में ईरान से अपनी खरीद 12 फीसदी कम कर दी है और पूरा ध्यान रूसी तेल पर लगा दिया है।
चीन की यह रणनीति उसे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच न केवल सस्ता ईंधन उपलब्ध करा रही है, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।