छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में आधार ,अनिवार्य होते ही मचा हड़कं एक झटके में कम हुए 10 लाख छात्र
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में नामांकन (Enrollment) के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किए जाने के बाद छात्र संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में करीब 10 लाख की कमी आई है। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग से लेकर शासन तक खलबली मच गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब तक 'कागजी' छात्रों के नाम पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा था?
फर्जी नामांकन पर 'आधार' की स्ट्राइक?
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का बजट छात्र संख्या के आधार पर तय होता है। आधार कार्ड लिंकिंग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले नामांकन का आंकड़ा बहुत अधिक था। लेकिन जैसे ही U-DISE पोर्टल पर आधार आधारित डेटा अनिवार्य किया गया, 10 लाख ऐसे नाम सामने आए जो या तो डुप्लीकेट थे या जिनका अस्तित्व ही नहीं था।
क्यों कम हुई छात्रों की संख्या? मुख्य कारण:
डुप्लीकेट एंट्री: कई छात्रों के नाम एक से अधिक स्कूलों में दर्ज थे।
फर्जी नाम: योजनाओं का लाभ लेने के लिए कागजों पर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाई जा रही थी।
डेटा मिसमैच: कई छात्रों के आधार कार्ड न होने या डेटा गलत होने की वजह से उनका पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।
प्राइवेट स्कूलों की ओर झुकाव: आत्मानंद स्कूलों के अलावा अन्य सामान्य सरकारी स्कूलों से छात्रों का निजी स्कूलों में शिफ्ट होना।
शिक्षा विभाग की सफाई: "यह गिरावट नहीं, शुद्धिकरण है"
इस मामले पर विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या में गिरावट नहीं बल्कि 'डेटा का शुद्धिकरण' है। आधार अनिवार्य होने से अब केवल उन्हीं छात्रों को योजनाओं का लाभ मिलेगा जो वास्तव में स्कूल आ रहे हैं। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी खजाने की बचत होगी। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए आरोप लगाया है कि आधार की जटिलता के कारण गरीब बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे हैं।
सरकार की अगली रणनीति
राज्य सरकार अब उन स्कूलों की जांच करने की तैयारी में है जहाँ छात्र संख्या में सबसे अधिक गिरावट देखी गई है। साथ ही, जिन बच्चों के पास अब तक आधार कार्ड नहीं है, उनके लिए स्कूलों में ही विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी वास्तविक छात्र शिक्षा से वंचित न रहे।