Anta Byelection Rajasthan : जब अंता की सड़कों पर एक साथ उतरीं वसुंधरा और भजनलाल, तो कांग्रेस के कैंप में मची खलबली
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के अंता विधानसभा उपचुनाव का चुनावी पारा अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कांग्रेस के इस पारंपरिक और अभेद माने जाने वाले किले में सेंध लगाने के लिए अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। गुरुवार को अंता की सड़कों पर एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। राज्य की दो सबसे बड़ी राजनीतिक हस्तियां - पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा - एक साथ, एक ही जीप पर सवार होकर रोड शो में उतरे।
यह रोड शो बीजेपी के उम्मीदवार मोरपाल सुमन के समर्थन में निकाला गया था, जिसमें हज़ारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम लोग उमड़ पड़े। 'जय श्री राम' के नारों से पूरा कस्बा गूंज उठा। यह महज़ एक चुनावी रोड शो नहीं था, बल्कि कांग्रेस को उसी के गढ़ में दी गई बीजेपी की एक ज़बरदस्त चुनौती थी।
एक जीप, दो बड़े नेता और कई सियासी संदेश
वसुंधरा राजे और भजनलाल शर्मा का एक साथ, एक ही मंच (जीप) पर आना अपने आप में एक बड़ी राजनीतिक घटना है। इस एक तस्वीर से बीजेपी ने कई निशाने साधे:
- पार्टी में एकजुटता का संदेश: बीजेपी ने यह साफ़ संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और पूरी पार्टी एकजुट होकर अंता की सीट जीतने के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि अतीत में कई बार वसुंधरा राजे और मौजूदा राज्य नेतृत्व के बीच मनमुटाव की खबरें सुर्खियां बटोर चुकी हैं।
- राजे का 'होम कमिंग': वसुंधरा राजे का चुनावी राजनीति में इस तरह से सक्रिय होना, उनके समर्थकों के लिए एक बड़ा बूस्ट है। उन्होंने अपने पुराने और जाने-पहचाने अंदाज़ में लोगों का अभिवादन किया और कहा, "अंता मेरा परिवार है और मैं अपने परिवार के बीच आई हूं ताकि यहां फिर से कमल का फूल खिल सके।"
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जनता से मोरपाल सुमन को भारी मतों से जिताने की अपील करते हुए कहा, "कांग्रेस ने हमेशा अंता की जनता को धोखा दिया है, लेकिन बीजेपी विकास और विश्वास की राजनीति करती है।"
क्यों ख़ास है अंता की यह सीट?
अंता विधानसभा सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया के इस्तीफ़े के बाद खाली हुई थी। भाया और उनके परिवार का इस क्षेत्र में काफ़ी दबदबा माना जाता है, इसलिए इस सीट पर जीतना बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। यह उपचुनाव न सिर्फ़ एक विधायक का फ़ैसला करेगा, बल्कि यह राज्य की भजनलाल सरकार के शुरुआती कामकाज पर जनता की मुहर भी माना जाएगा।
इस 'डबल इंजन' के शक्ति प्रदर्शन से बीजेपी ने न सिर्फ़ अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है, बल्कि कांग्रेस को भी यह जता दिया है कि अंता की लड़ाई इस बार आसान नहीं होने वाली है।