बीजेपी की एक और चाल पकड़ी गई? अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर छेड़ा बड़ा युद्ध, यूपी की राजनीति में मचा हड़कंप
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो जब पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों के तीर न चलते हों। लेकिन इस बार मुद्दा काफी गंभीर है 'जनगणना' का। अभी देश में जनगणना की सुगबुगाहट शुरू ही हुई थी कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक ऐसा दावा कर दिया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
अखिलेश यादव का कहना है कि सरकार की तरफ से जो जनगणना का ताजा नोटिफिकेशन आया है, उसमें से 'जाति' का कॉलम ही गायब है। सुनने में यह एक तकनीकी बात लग सकती है, लेकिन अखिलेश ने इसे एक बड़े राजनीतिक हथियार में बदल दिया है। उनका सीधा आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक बार फिर एक्सपोज हो गई है।
अखिलेश और विपक्ष काफी समय से मांग कर रहे हैं कि देश में 'जाति आधारित जनगणना' होनी चाहिए। उनका तर्क साफ है अगर हमें यह नहीं पता होगा कि किस समाज की कितनी संख्या है, तो सरकार उनकी भलाई के लिए सही योजनाएं और आरक्षण कैसे लागू करेगी? लेकिन जब अखिलेश को इस नए नोटिफिकेशन में जाति का कॉलम नहीं दिखा, तो उन्होंने इसे बीजेपी की 'पुरानी मानसिकता' करार दिया।
अखिलेश का मानना है कि यह पिछड़े, दलित और शोषित समाज के हक पर वार करने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने साफ़ लफ्ज़ों में कह दिया कि अगर डेटा में जाति ही नहीं होगी, तो हक किसे और कितना मिलेगा, इसका अंदाजा कैसे लगेगा?
वहीं, इस मुद्दे पर लोगों के बीच भी काफी चर्चा है। लोग अब इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या डिजिटल होती जनगणना के इस दौर में भी अपनी पहचान का यह अहम हिस्सा डेटा से बाहर रह जाएगा? फिलहाल तो अखिलेश ने अपनी तरफ से गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। अब देखना ये होगा कि क्या सरकार इस पर कोई सफाई देती है या फिर आने वाले दिनों में यह 'जाति जनगणना' का जिन्न यूपी की सड़कों पर फिर से बड़े आंदोलन की शक्ल लेगा।