Amit Shah on Bastar Naxalism: 'बस्तर से लाल आतंक का साया खत्म', लोकसभा में अमित शाह की हुंकार- हथियार उठाने वालों को मोदी सरकार देगी मुंहतोड़ जवाब
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश की आंतरिक सुरक्षा और नक्सलवाद के मोर्चे पर मिली बड़ी कामयाबी का ब्यौरा पेश किया। गृह मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी 'लाल आतंक' का गढ़ माना जाता था, अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है। अमित शाह ने इस बदलाव का श्रेय मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और क्षेत्र में पहुंचे जमीनी विकास को दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि हिंसा और हथियार उठाने वालों के लिए इस व्यवस्था में कोई जगह नहीं है।
"हथियार उठाने वालों को मिलेगा करारा जवाब": अमित शाह की चेतावनी
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने उग्रवादी विचारधारा रखने वालों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यह मोदी सरकार है, जो भी हथियार उठाएगा, उसे उसी की भाषा में जवाब मिलेगा।” शाह ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में किसी भी अन्याय का समाधान केवल देश के संविधान के भीतर ही संभव है। व्यवस्था को नकारकर बंदूक उठाना विकास का रास्ता नहीं हो सकता। उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे को अंतिम चरण में बताते हुए सुरक्षा बलों की कार्रवाई की सराहना की।
सुरक्षा बलों के बलिदान और 'कोबरा' बल की सराहना
अमित शाह ने नक्सल विरोधी अभियान में शामिल सुरक्षा बलों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर में दिख रहा यह बड़ा बदलाव CAPF के जवानों—खासकर कोबरा (CoBRA) बल—छत्तीसगढ़ पुलिस और डीआरजी (DRG) के कर्मियों के बलिदान का परिणाम है। गृह मंत्री ने उन हजारों जवानों और स्थानीय नागरिकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने सदन की ओर से शहीद जवानों को नमन करते हुए कहा कि वामपंथी उग्रवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।
बंदूक की जगह बस्तर में अब पहुंच रहा है 'विकास'
नक्सलवाद के खात्मे के पीछे सरकार की 'विकास' रणनीति को सबसे अहम बताते हुए अमित शाह ने कहा कि अब बस्तर के दूर-दराज के गांवों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है। उन्होंने विपक्ष के उन दावों को खारिज किया जो उग्रवाद को न्याय की लड़ाई बताते हैं। शाह ने बताया कि बस्तर के हर गांव में अब अभियान चलाकर बदलाव लाया जा रहा है:
शिक्षा और स्वास्थ्य: बस्तर के गांवों में नए स्कूल खोले गए हैं और हर तहसील व पंचायत स्तर पर अस्पतालों का निर्माण किया गया है।
राशन और बुनियादी सुविधाएं: ग्रामीणों को आधार कार्ड और राशन कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उन्हें हर महीने 5 किलो अनाज मिल रहा है।
उज्ज्वला योजना: महिलाओं की सुविधा के लिए घर-घर गैस चूल्हे पहुंचाए जा रहे हैं।
राशन दुकानें: दुर्गम इलाकों में भी सरकारी उचित मूल्य की दुकानें खोली गई हैं ताकि बिचौलियों का अंत हो सके।
उग्रवाद को मिलने वाला जन-समर्थन हुआ समाप्त
अमित शाह के मुताबिक, जब विकास की किरणें उन इलाकों तक पहुंचीं जहां कभी पहुंचना असंभव था, तो उग्रवाद को मिलने वाला स्थानीय समर्थन अपने आप खत्म हो गया। बुनियादी सुविधाओं ने लोगों का भरोसा लोकतंत्र और सरकार में बहाल किया है। उन्होंने दोहराया कि बस्तर अब लाल आतंक की छाया से बाहर निकलकर प्रगति की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है, जो नए भारत की सुरक्षा रणनीति की एक बड़ी जीत है।