गलवान की कड़वाहट के बीच अचानक BJP दफ्तर पहुंचे चीनी नेता, क्या सच में बदल रहे हैं हालात?
News India Live, Digital Desk: दिल्ली की राजनीति में अक्सर छोटी-बड़ी मुलाकातें होती रहती हैं, लेकिन सोमवार को जो हुआ, उसने सबको चौका दिया। साल 2020 में जब से गलवान घाटी में वो हिंसक झड़प हुई थी, तब से भारत और चीन के बीच जैसे एक ठंडी जंग सी चल रही थी। पर अब करीब 5 साल बाद, दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित BJP Headquarters में कुछ ऐसा हुआ, जिसने संकेत दिए हैं कि शायद कूटनीति की बंद खिड़कियां अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं।
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का एक बड़ा डेलिगेशन कल बीजेपी दफ्तर पहुंचा। इसकी अगुवाई कर रही थीं चीन की वाइस मिनिस्टर सन हैयान। आप अंदाजा लगाइए कि यह मुलाकात कितनी अहम है, क्योंकि 2020 की कड़वाहट के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों की मुख्य पार्टियों के बड़े नेता आधिकारिक तौर पर टेबल के आमने-सामने बैठे।
मुलाकात में क्या खास रहा?
बीजेपी की तरफ से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश विभाग के इंचार्ज विजय चौथाईवाले ने मेहमानों की अगवानी की। बातचीत का माहौल गंभीर लेकिन सकारात्मक बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो चीन ने बीजेपी को अपनी पार्टी की विचारधारा और काम करने के तरीके समझने का न्योता दिया है। इसका मतलब साफ है—रिश्तों पर जमी बर्फ अब धीरे-धीरे पिघल रही है।
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, केरल और चेन्नई का भी प्लान है!
ये डेलिगेशन सिर्फ बीजेपी दफ्तर तक ही सीमित नहीं है। खबर तो ये भी है कि ये चीनी नेता RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के बड़े नेताओं से मिलने झंडेवालान भी जा सकते हैं। इसके बाद वे केरल और चेन्नई का दौरा भी करेंगे। ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस में मुलाकात हुई थी और सीमा पर सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
आखिर इसका असर क्या होगा?
एक सामान्य भारतीय नागरिक के तौर पर देखा जाए, तो ये बड़ी खबर है। क्या व्यापार और बॉर्डर पर शांति के नए रास्ते खुलेंगे? हालांकि विपक्ष के अपने सवाल होंगे, लेकिन रणनीतिक नजरिए से देखा जाए तो दो पड़ोसियों का बातचीत करना ही समस्याओं का इकलौता समाधान है।
दिल्ली की इस बैठक ने इतना तो साफ कर दिया है कि India-China Diplomatic Ties अब नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस शिष्टाचार भेंट का जमीनी असर क्या होता है।