Amalaki Ekadashi 2026 : कब है आमलकी एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त, पारण का समय और इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा
News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे आमलकी एकादशी या 'रंगभरी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन से ब्रज में होली के उत्सव की शुरुआत हो जाती है। आइए जानते हैं साल 2026 में आमलकी एकादशी की सही तारीख, व्रत पारण का समय और इसका पौराणिक महत्व।
आमलकी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Dates & Timings)
पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में आमलकी एकादशी की तिथियां इस प्रकार हैं:
एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026, शनिवार।
एकादशी तिथि समाप्त: 01 मार्च 2026, रविवार।
व्रत की तिथि: उदयातिथि के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत 01 मार्च 2026 (रविवार) को रखा जाएगा।
पारण का समय: व्रत का पारण 02 मार्च 2026 को सुबह सूर्योदय के बाद किया जाएगा।
आंवले के पेड़ की पूजा क्यों है जरूरी? (Significance of Amla Tree)
'आमलकी' का अर्थ है आंवला। शास्त्रों के अनुसार, आंवले के वृक्ष को भगवान विष्णु ने अत्यंत प्रिय माना है:
ईश्वरीय वास: माना जाता है कि आंवले के पेड़ के हर हिस्से में देवताओं का वास होता है। इसकी जड़ में विष्णु, तने में शिव और शाखाओं में ब्रह्मा जी का वास माना गया है।
मोक्ष की प्राप्ति: इस दिन आंवले के फल का सेवन करना और इसे दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
आरोग्य और सुख: आंवला आयुर्वेद में भी अमृत समान है, इसलिए इस दिन इसकी पूजा उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रतीक मानी जाती है।
रंगभरी एकादशी का खास संयोग
वाराणसी (काशी) में इस दिन को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे। इस दिन बाबा विश्वनाथ को अबीर-गुलाल चढ़ाया जाता है।
पूजा विधि और नियम (Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष दीप जलाएं।
यदि संभव हो तो आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का पूजन करें।
वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और उसे धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
इस दिन आंवले का उबटन लगाना और आंवले के जल से स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है।