आखिर खुल ही गया राज! ऑफिस में पुरुषों को गर्मी और महिलाओं को ठंड क्यों लगती है?
ऑफिस में अक्सर एक 'AC वॉर' छिड़ा रहता है। एक तरफ पुरुष होते हैं जिन्हें हमेशा गर्मी लगती है और AC तेज़ करने की मांग करते हैं, तो दूसरी तरफ महिलाएं होती हैं जो शॉल या जैकेट ओढ़कर कांप रही होती हैं।
यह नज़ारा लगभग हर ऑफिस का है। अक्सर महिलाओं की इस शिकायत को यह कहकर उड़ा दिया जाता है कि "तुम्हें तो बस ठंड लगती रहती है!" लेकिन क्या यह सिर्फ एक एहसास है या इसके पीछे कोई ठोस वजह भी है?
तो चलिए, आज इस राज़ से पर्दा उठाते हैं। जी हाँ, यह सिर्फ आपका वहम नहीं है कि आपको ऑफिस में ज़्यादा ठंड लगती है, इसके पीछे पक्के वैज्ञानिक कारण हैं।
1. असली खिलाड़ी है 'मेटाबॉलिज्म'
इसे शरीर का 'इंजन' समझिए। हमारा शरीर जब आराम कर रहा होता है, तब भी ऊर्जा (कैलोरी) जलाता रहता है, और इसी प्रक्रिया में गर्मी पैदा होती है। इसे 'रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट' कहते हैं।
- क्या है फ़र्क? स्टडीज़ बताती हैं कि पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले मांसपेशियां (muscle mass) ज़्यादा होती हैं, फैट कम होता है। और ये मांसपेशियां आराम करते समय भी ज़्यादा कैलोरी जलाती हैं, जिससे शरीर में ज़्यादा गर्मी पैदा होती है। सीधी भाषा में कहें तो, पुरुषों का 'इंजन' थोड़ा ज़्यादा गर्म रहता है।
2. शरीर की बनावट भी है एक वजह
यह सुनने में शायद थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यह सच है। महिलाओं के शरीर में पुरुषों के मुकाबले फैट की मात्रा थोड़ी ज़्यादा होती है। यह फैट शरीर के अंदरूनी अंगों को गर्म रखने में तो मदद करता है, लेकिन यह गर्मी को त्वचा की सतह तक पहुंचने से रोकता है। नतीजा? शरीर अंदर से तो गर्म रहता है, लेकिन त्वचा ठंडी महसूस करती है, जिससे हमें ठंड का एहसास ज़्यादा होता है।
3. सबसे बड़ा कारण: ऑफिस का पुराना 'फॉर्मूला'
यह सबसे दिलचस्प वजह है! क्या आप जानते हैं कि ज़्यादातर ऑफिस की बिल्डिंगों में एयर कंडीशनिंग (AC) का तापमान किस आधार पर सेट किया जाता है? यह 1960 के दशक में बनाए गए एक फॉर्मूले पर आधारित है, जो एक 40 वर्षीय पुरुष (जिसका वज़न लगभग 70 किलो हो) के मेटाबॉलिक रेट को ध्यान में रखकर बनाया गया था।
आज दशकों बाद भी, ज़्यादातर ऑफिसों के AC उसी पुराने पुरुष-केंद्रित फॉर्मूले पर सेट होते हैं! ज़ाहिर है, जो तापमान उस फॉर्मूले के हिसाब से एक पुरुष के लिए एकदम परफेक्ट होता है, वही तापमान महिलाओं के मेटाबॉलिक रेट के हिसाब से काफी 'ठंडा' हो जाता है।
तो अगली बार जब कोई AC का तापमान बढ़ाने पर आपको ताना मारे, तो आप उसे मुस्कुराकर यह वैज्ञानिक कारण बता सकती हैं! यह कोई शिकायत नहीं, बल्कि एक बायोलॉजिकल सच्चाई है।