"आखिर इतनी भी क्या जल्दी थी?" - जब हाईकोर्ट के ही एक फैसले पर दूसरे जजों ने जताई हैरानी

Post

 न्याय और अदालत की दुनिया में आमतौर पर सब कुछ कायदे-कानून और तय प्रक्रिया से चलता है। लेकिन हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ ऐसा हुआ, जिसे सुनकर बड़े-बड़े कानून के जानकार भी हैरान हैं। मामला इतना अनोखा है कि इसमें एक ही कोर्ट के जजों ने अपने ही एक दूसरे जज के फैसले और उसके तरीके पर सवाल उठा दिए।

क्या है ये पूरा मामला?

ये कहानी जुड़ी है गाजियाबाद विकास प्राधिकरण यानी GDA की एक तोड़फोड़ की कार्रवाई से। GDA ने सरकारी ज़मीन पर हुए अवैध कब्ज़े को हटाने के लिए बुलडोजर चलाना शुरू किया। जिनके कब्ज़े हटाए जा रहे थे, उनमें से एक आदमी (याचिकाकर्ता) तुरंत हाईकोर्ट पहुंच गया।

अब यहीं से कहानी में एक असाधारण मोड़ आता है। याचिकाकर्ता की अपील पर हाईकोर्ट के एक सिंगल जज (एक जज की बेंच) ने रात में ही सुनवाई कर ली। और सिर्फ सुनवाई ही नहीं की, बल्कि GDA को बिना सुने ही तोड़फोड़ की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने का आदेश भी दे दिया।

जब डबल बेंच ने उठाए सवाल

जब GDA को इस आदेश का पता चला, तो वो इस फैसले के खिलाफ़ एक डबल बेंच (दो जजों की बेंच) के पास पहुंच गए। डबल बेंच ने जब इस पूरे मामले को देखा और सिंगल बेंच के आदेश को पढ़ा, तो वो भी हैरान रह गए।

उन्होंने जो सवाल उठाए, वो बहुत गंभीर थे। उन्होंने पूछा, "आखिर तोड़फोड़ को रोकने के लिए इतनी भी क्या जल्दी थी?" जजों ने इस बात पर हैरानी जताई कि GDA, जो इस मामले में एक मुख्य पार्टी थी, उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही एकतरफा फैसला कैसे दे दिया गया?

डबल बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसा लगता है जैसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने सिंगल बेंच के उस जल्दबाजी में दिए गए फैसले पर तुरंत रोक लगा दी। अब इस मामले की पूरी सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी, जिसमें दोनों पक्षों को सुना जाएगा।

यह मामला इस बात का एक बड़ा उदाहरण है कि न्याय की प्रक्रिया में हर पक्ष को सुनना कितना ज़रूरी है और किसी भी तरह की जल्दबाजी न्याय के उसूलों के खिलाफ़ हो सकती है।