Aditya Pancholi Rape Case : 28वीं सुनवाई, 12वां नोटिस कोर्ट पहुँचे 60 साल के आदित्य पंचोली
News India Live, Digital Desk : बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली एक बार फिर कानून के शिकंजे और अदालती कार्यवाहियों के बीच चर्चा में हैं। साल 2019 में एक मशहूर अभिनेत्री (और वर्तमान सांसद) द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामले में पंचोली ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वे अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द (Quash) करने की मांग कर रहे हैं। आज हुई 28वीं सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतकर्ता पक्ष को लेकर सख्त टिप्पणी की है।
आज की सुनवाई की 3 बड़ी बातें (Major Highlights)
अभिनेत्री को 12वां नोटिस: सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस अब तक पीड़िता को बयान दर्ज कराने के लिए 11 बार नोटिस भेज चुकी है, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुईं। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आज फिर (12वीं बार) नोटिस जारी किया है।
आदित्य पंचोली की मौजूदगी: अभिनेता आज खुद कोर्ट रूम में पेश हुए। उनके वकील प्रशांत पाटिल ने तर्क दिया कि यह FIR 'दुर्भावनापूर्ण' है और कथित घटना के करीब 15 साल बाद दर्ज कराई गई है, जो कानूनन गलत है।
अगली तारीख: शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च 2026 तय कर दी है।
क्या है पूरा विवाद? (Flashback to 2019)
यह मामला जून 2019 का है, जब वर्सोवा पुलिस स्टेशन में आदित्य पंचोली के खिलाफ धारा 376 (रेप), 328 (जहर देना), 384 (जबरन वसूली) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोप: अभिनेत्री का आरोप था कि करियर के शुरुआती दौर (2004-2009) में पंचोली ने उन्हें नशीला पदार्थ देकर उनका यौन शोषण किया और आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए उन्हें ब्लैकमेल किया।
पंचोली का दावा: अभिनेता का कहना है कि उन्हें झूठा फँसाया गया है। उनके पास एक ऐसी रिकॉर्डिंग भी है जो साबित करती है कि FIR दर्ज करने के पीछे गलत इरादा था।
'भजनलाल' फैसले का हवाला
आदित्य पंचोली के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के मशहूर 'भजनलाल' फैसले का हवाला देते हुए FIR को रद्द करने की मांग की है। इस कानूनी प्रावधान के तहत, यदि कोई केस केवल निजी रंजिश निकालने के लिए या बिना किसी ठोस सबूत के दर्ज किया गया हो, तो हाई कोर्ट उसे रद्द कर सकता है।
अब आगे क्या?
पंचोली ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मामला अब समाप्ति की ओर है, लेकिन चूंकि यह अभी कोर्ट में है, इसलिए मैं ज्यादा कुछ नहीं बोल सकता।" अब सबकी नजरें 4 मार्च की सुनवाई पर हैं, जहाँ शिकायतकर्ता पक्ष को अपना रुख स्पष्ट करना होगा।