आईटी दिग्गज प्रेमजी के एक बयान ने बदली झारखंड की इमेज, क्या वाकई बदलने वाला है राज्य का भाग्य?
News India Live, Digital Desk : अक्सर जब भी झारखंड की बात होती है, तो हमारे दिमाग में कोयले की खदानें, घने जंगल और पुरानी राजनीति ही घूमती है। लेकिन पिछले कुछ सालों में राज्य अपनी इस छवि को बदलने के लिए एक शांत क्रांति की तैयारी कर रहा है। इसी तैयारी और राज्य के 'विज़न 2050' की तारीफ अब विप्रो के पूर्व चेयरमैन और जाने-माने समाजसेवी अज़ीम प्रेमजी ने भी की है।
प्रेमजी क्यों हैं प्रभावित?
देखा जाए तो झारखंड ने भविष्य के लिए जो खाका खींचा है, उसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को आगे लाने की बात कही गई है। प्रेमजी को लगा कि राज्य का जो लक्ष्य (विज़न) है, वह केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें झारखंड को विकसित बनाने की एक तड़प और साफ नियत दिखती है। अज़ीम प्रेमजी का मानना है कि अगर किसी राज्य के पास अगले 25-30 सालों की साफ़ प्लानिंग हो, तो उसे तरक्की करने से कोई नहीं रोक सकता।
इसका फायदा झारखंड को क्या होगा?
यकीनन, जब अज़ीम प्रेमजी जैसा शख्स झारखंड के बारे में कुछ सकारात्मक बोलता है, तो इससे बड़े निवेशकों (Investors) का भरोसा बढ़ता है। इससे यह मैसेज जाता है कि झारखंड अब केवल पत्थर और खनिजों का प्रदेश नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यापार, टेक्नोलॉजी और नई सोच के लिए भी दरवाजे खोल रहा है। प्रेमजी फांउडेशन भी राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी सक्रिय है, और उनकी ये तारीफ उनके झारखंड से बढ़ते जुड़ाव को भी दर्शाती है।
एक बड़ा संदेश
झारखंड के लोगों के लिए यह खबर किसी गर्व से कम नहीं है। सालों से जिसे पिछड़ा कहा गया, अब वहां के सरकारी स्कूल, कॉलेज और बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधार की गूँज बंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक पहुँच रही है। यकीनन, चुनौतियां अब भी बहुत हैं, लेकिन जब रास्ते का विज़न साफ हो और अनुभवी लोगों की शाबासी साथ हो, तो मंजिल करीब महसूस होने लगती है।
उम्मीद है कि आने वाले समय में ये विज़न सच में ज़मीन पर उतरेगा और झारखंड के युवाओं को अपने ही राज्य में वे अवसर मिलेंगे जिनका वे हकदार हैं।