8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का बदलेगा फॉर्मूला! 3% की जगह 5% इंक्रीमेंट का प्रस्ताव; जानें कितना बढ़ेगा आपका वेतन
नई दिल्ली। देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। अगले वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट के बीच कर्मचारी संगठनों ने सरकार को सैलरी बढ़ाने का एक बिल्कुल नया और क्रांतिकारी फॉर्मूला सुझाया है। इस प्रस्ताव के अनुसार, अब कर्मचारियों की सैलरी में केवल 10 साल में एक बार बड़ा बदलाव नहीं होगा, बल्कि हर साल वेतन में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाएगी। डाक कर्मचारियों के संगठन (FNPO) द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव ने कर्मचारियों के बीच नई उम्मीदें जगा दी हैं।
सालाना 3% नहीं, अब 5% इंक्रीमेंट की मांग
वर्तमान व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारियों को सालाना 3 प्रतिशत की वेतन वृद्धि (Increment) मिलती है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि निजी क्षेत्र की तुलना में यह बढ़ोतरी बहुत कम है और बढ़ती महंगाई के सामने नाकाफी साबित हो रही है। नए प्रस्ताव में सालाना इंक्रीमेंट को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने पर जोर दिया गया है। यदि सरकार इसे मान लेती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी हर साल तेजी से बढ़ेगी, जिससे उनका मनोबल और क्रय शक्ति दोनों में इजाफा होगा।
फिटमेंट फैक्टर: अलग-अलग लेवल के लिए अलग-अलग गुणांक
सैलरी निर्धारण में 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था। FNPO ने सुझाव दिया है कि इस बार सभी के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर के बजाय लेवल के आधार पर इसे तय किया जाए:
निचला स्तर (Lower Level): 3.0 फिटमेंट फैक्टर
मध्यम स्तर (Mid Level): 3.05 से 3.10 फिटमेंट फैक्टर
वरिष्ठ स्तर (Senior Level): 3.20 से 3.25 फिटमेंट फैक्टर
इस बदलाव का उद्देश्य निचले स्तर के कर्मचारियों को अधिक आर्थिक राहत देना है, जिन्हें महंगाई की मार सबसे ज्यादा झेलनी पड़ती है।
पे मैट्रिक्स सिस्टम: पारदर्शिता बनी रहेगी
अच्छी बात यह है कि कर्मचारी संगठनों ने 7वें वेतन आयोग के 'पे मैट्रिक्स सिस्टम' (Pay Matrix System) को हटाने के बजाय उसे जारी रखने की वकालत की है। यह सिस्टम सैलरी तय करने में पारदर्शिता लाता है और गणना को आसान बनाता है। प्रस्ताव के अनुसार, ढांचा वही रहेगा लेकिन वेतन वृद्धि का प्रतिशत और फिटमेंट फैक्टर बदल दिया जाएगा, जिससे अंतिम वेतन में बड़ी बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी।
वेतन आयोग का इतिहास और आवश्यकता
भारत में आमतौर पर हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, जिसके 10 साल 2026 में पूरे होने जा रहे हैं। वेतन आयोग का मुख्य काम कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करना होता है। नया आयोग न केवल सेवारत कर्मचारियों बल्कि करोड़ों पेंशनभोगियों के भविष्य पर भी सीधा असर डालता है।
आगे क्या? सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल ये सुझाव कर्मचारी संगठनों की ओर से सरकार को भेजे गए हैं। 8वें वेतन आयोग के गठन और इन सिफारिशों पर अंतिम मुहर केंद्र सरकार को लगानी है। यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है, तो यह सरकारी नौकरी के आकर्षण को और बढ़ा देगा। हालांकि, आधिकारिक घोषणा में अभी कुछ समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों ने अपनी जमीन तैयार कर ली है।