7th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को तगड़ा झटका, 18 महीने के DA एरियर पर सरकार ने सुनाया अपना फाइनल फैसला
7th Pay Commission: लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का 18 महीने के बकाया महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का लंबा इंतजार अब एक बड़े झटके में बदल गया है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि कोविड-19 काल के दौरान रोके गए इस एरियर का भुगतान फिलहाल संभव नहीं है। लगातार 6 सालों से संघर्ष कर रहे कर्मचारी संगठनों के लिए यह खबर किसी बड़ी निराशा से कम नहीं है, क्योंकि वे लंबे समय से इस रुके हुए पैसे की आस लगाए बैठे थे।
आखिर क्यों सरकार ने किया भुगतान से इनकार?
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 15 अप्रैल 2026 को जारी किए गए एक आधिकारिक पत्र में इस कड़े फैसले की असल वजह साफ की गई है। सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े गंभीर वित्तीय प्रभाव का हवाला दिया है। मंत्रालय का कहना है कि उस मुश्किल दौर में देश की स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं पर बड़े पैमाने पर अचानक खर्च करना पड़ा था, जिससे सरकारी खजाने पर भारी दबाव बढ़ गया था। इसी विपरीत परिस्थिति को देखते हुए 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से लागू होने वाली DA और DR की तीन किस्तों को फ्रीज करने का फैसला लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी नहीं दिखा असर
गौरतलब है कि डिफेंस रिकॉग्नाइज्ड एसोसिएशन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए इस रुके हुए एरियर को जारी करने की पुरजोर मांग की गई थी। लेकिन, वित्त मंत्रालय ने अपने जवाब में साफ कर दिया है कि महामारी का आर्थिक असर सिर्फ एक साल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वित्त वर्ष 2020-21 के बाद भी लंबे समय तक जारी रहा। ऐसे में मौजूदा वित्तीय परिस्थितियों का आकलन करते हुए इन रुकी हुई किस्तों का एरियर एक साथ देना सरकार के लिए व्यावहारिक तौर पर मुमकिन नहीं है।
अब आगे क्या है उम्मीद?
सरकार के इस सख्त और स्पष्ट रुख से यह लगभग तय हो गया है कि फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस मोर्चे पर कोई भी आर्थिक राहत नहीं मिलने वाली है। हालांकि, कर्मचारी यूनियनें लगातार इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाती रही हैं और इसे अपना हक बताती रही हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय के इस ताजा बयान ने उनकी उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर उन लाखों परिवारों की वित्तीय प्लानिंग को प्रभावित करेगा जो इस भारी-भरकम एरियर के मिलने की उम्मीद कर रहे थे।