जयपुर में गिरा 5 मंजिला आशियाना सवा लाख की फीस भरने के बाद भी आंखों के सामने टूटा सपना
News India Live, Digital Desk : हम सब जानते हैं कि एक इंसान के लिए उसका घर सिर्फ़ ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं, बल्कि जिन्दगी भर की जमा-पूंजी और जज्बात होता है। लोग पाई-पाई जोड़कर एक छत खड़ी करते हैं। लेकिन जयपुर में एक मकान मालिक के साथ जो हुआ, उसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाएगा। एक तरफ प्रशासन की कार्रवाई और दूसरी तरफ एक परिवार की बेबसी।
मामला जयपुर का है, जहाँ एक 5 मंजिला इमारत (5-Storey Building) को ज़मींदोज़ (Demolish) कर दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मकान मालिक ने इस मकान को बचाने या नियमित कराने की उम्मीद में नगर निगम को 1.25 लाख रुपये की फीस भी जमा करवाई थी। लेकिन अफ़सोस, न पैसा काम आया और न ही मन्नतें।
आखिर घर क्यों गिराना पड़ा?
दरअसल, यह इमारत तकनीकी रूप से खतरनाक हो चुकी थी। कुछ समय पहले इस 5 मंजिला बिल्डिंग में बड़ी-बड़ी दरारें (Cracks) आ गई थीं। बात सिर्फ़ दरारों तक होती तो शायद मरम्मत हो जाती, लेकिन यह इमारत एक तरफ झुकने (Tilt) लगी थी।
पड़ोसियों की जान सांसत में थी। उन्हें डर था कि कहीं यह बिल्डिंग उनके ऊपर न गिर जाए। प्रशासन ने जब जांच की तो पाया कि इसकी नींव (Foundation) शायद इतनी मजबूत नहीं थी कि वो 5 मंजिला भार झेल सके। इसे 'असुरक्षित' माना गया।
फीस देने के बाद भी रहम क्यों नहीं?
यही इस कहानी का सबसे दुखद पहलू है। मकान मालिक ने शायद सोचा होगा कि नगर निगम में नियमतीकरण (Regularization) की फीस या जुर्माना भरने से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने लगभग सवा लाख रुपये जमा भी कराए। उन्हें लगा रसीद मिल गई, तो घर बच गया।
लेकिन प्रशासन का तर्क साफ़ होता है—"अगर इमारत गिरने की कगार पर है और उससे जान-माल का खतरा है, तो कोई भी फीस उसे नहीं बचा सकती।" सुरक्षा नियमों के आगे पैसों की रसीद रद्दी का टुकड़ा बन कर रह गई।
बुलडोजर चला और सपने बिखर गए
अंततः वही हुआ जिसका डर था। निगम की टीम और मशीनरी पहुंची, और देखते ही देखते वो ऊंची इमारत मलबे के ढेर में बदल गई। जिस घर को बनाने में सालों लगे होंगे, उसे गिरने में कुछ घंटे भी नहीं लगे।
आपके लिए क्या सबक है?
दोस्तों, जयपुर की यह घटना हम सभी के लिए एक "अलार्म" है।
- नींव और इंजीनियरिंग: घर बनाते समय सिर्फ़ ठेकेदार के भरोसे न रहें। अच्छी इंजीनियरिंग सलाह लें, ताकि नींव मजबूत हो।
- नियमों का पालन: अवैध निर्माण या बिना नक्शे के ज़्यादा मंजिलें खड़ी करना अंत में भारी ही पड़ता है।
- सुरक्षा पहले: अगर घर झुक रहा है, तो कोई फीस काम नहीं आएगी, क्योंकि जान से बढ़कर कुछ नहीं है।
यह मंजर डरावना ज़रूर है, लेकिन यह याद दिलाता है कि निर्माण में 'जुगाड़' नहीं चलता।