भगवान श्री राम के चरणों में छिपे थे ब्रह्मांड के 48 दिव्य चिह्न हर निशान में छिपा है सफलता और सुख का गहरा रहस्य

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News India Live, Digital Desk : रामायण केवल एक गाथा नहीं, बल्कि जीवन जीने का संपूर्ण दर्शन है। शास्त्रों के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का व्यक्तित्व जितना अलौकिक था, उनका भौतिक स्वरूप भी उतना ही दिव्य। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि श्री राम के चरण कमलों में ब्रह्मांड के 48 दिव्य चिह्न विद्यमान थे। इन चिह्नों का दर्शन मात्र ही साधक के कष्टों को दूर करने वाला माना गया है।

श्री राम के चरणों की दिव्यता: 24 चिह्न दाएं और 24 बाएं

महर्षि वाल्मीकि और तुलसीदास जी ने भगवान के चरणों की महिमा का गुणगान किया है। भगवान के दोनों चरणों में कुल 48 चिह्न थे, जो उनके 'विष्णु अवतार' और 'पूर्ण पुरुष' होने का प्रमाण थे:

दाहिने चरण (Right Foot): इसमें स्वास्तिक, वज्र, अंकुश और ध्वज जैसे चिह्न थे जो विजय, सुरक्षा और धर्म की स्थापना का प्रतीक हैं।

बाएं चरण (Left Foot): इसमें कमल, धनुष, चंद्रमा और शंख जैसे चिह्न थे जो शांति, शीतलता और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

प्रमुख 5 चिह्न और उनका आध्यात्मिक अर्थ

इन 48 चिह्नों में से कुछ प्रमुख निशानों का अर्थ भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी है:

स्वास्तिक: यह चारों दिशाओं में मंगल और शुभता का प्रतीक है। जिस घर में प्रभु के चरणों का स्वास्तिक होता है, वहां नकारात्मकता नहीं टिकती।

वज्र: यह इंद्र का अस्त्र है, जो भक्त के जीवन में आने वाली बाधाओं और पापों के कठोर पहाड़ों को तोड़ने की शक्ति देता है।

कमल: यह संसार में रहते हुए भी निर्लिप्त रहने की कला सिखाता है। जैसे कमल कीचड़ में रहकर भी पवित्र रहता है।

अंकुश: यह मन रूपी हाथी को वश में करने का प्रतीक है। यह संकेत देता है कि प्रभु अपने भक्त की चंचलता को नियंत्रित करते हैं।

ध्वज (झंडा): यह धर्म की विजय और शरणागत की रक्षा का प्रतीक है।

क्यों किया जाता है 'चरण पादुका' का पूजन?

रामायण के अनुसार, जब भगवान राम वनवास गए, तो भरत जी ने उनकी चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर राज-काज चलाया। इसका कारण इन 48 चिह्नों की शक्ति ही थी।

ऊर्जा का केंद्र: माना जाता है कि ये 48 चिह्न ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक ऊर्जा को केंद्रित करते हैं।

सफलता का मार्ग: इन चिह्नों का ध्यान करने से व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और अहंकार का नाश होता है।

रामलला के दर्शन और इन चिह्नों का संयोग

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी प्रभु के विग्रह के निर्माण में इन पौराणिक बारीकियों का ध्यान रखा गया है। भक्त जब प्रभु के चरणों की वंदना करते हैं, तो वे अनजाने में ही ब्रह्मांड की इन 48 शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे होते हैं।