कल है साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, क्या भारत पर पड़ेगा असर? जानिए सूतक से जुड़े हर सवाल का जवाब

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21 September Surya Grahan 2025: साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण कल, यानी 21 सितंबर, रविवार को लगने जा रहा है। यह दिन और भी ख़ास इसलिए है क्योंकि इसी दिन पितृ पक्ष का समापन है और सर्व पितृ अमावस्या भी मनाई जाएगी। जब भी ग्रहण और अमावस्या का ऐसा संयोग बनता है, तो लोगों के मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएँ होती हैं।

तो चलिए, आपकी सारी दुविधाओं को दूर करते हैं और जानते हैं कि इस सूर्य ग्रहण का भारत पर क्या असर पड़ेगा और आपको कौन सी बातें ध्यान में रखनी हैं।

सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)

  • ग्रहण शुरू होगा: 21 सितंबर, सुबह 06:18 बजे
  • ग्रहण समाप्त होगा: सुबह 08:34 बजे

सबसे बड़ा सवाल: क्या यह भारत में दिखाई देगा?

नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण है, जो मुख्य रूप से न्यूज़ीलैंड, अंटार्कटिका और दक्षिणी महासागर के कुछ हिस्सों में ही नज़र आएगा।

क्या भारत में लगेगा सूतक काल?

यह सबसे ज़रूरी जानकारी है। ज्योतिष और हिन्दू धर्म के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल सिर्फ़ वहीं मान्य होता है, जहाँ ग्रहण दिखाई देता है। चूँकि यह सूर्य ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए यहाँ किसी भी तरह का सूतक काल नहीं लगेगा।

इसका सीधा-सा मतलब है कि:

  • आपको किसी भी तरह के विशेष नियम का पालन करने की ज़रूरत नहीं है।
  • मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ पर कोई रोक नहीं होगी।
  • आप सर्व पितृ अमावस्या का श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य अपने सामान्य समय पर बिना किसी चिंता के कर सकते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को भी घबराने या कोई विशेष परहेज़ करने की ज़रूरत नहीं है।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें (सामान्य मान्यताएँ)

भले ही यह ग्रहण भारत में प्रभावी न हो, लेकिन शास्त्रों में ग्रहण काल ​​को एक विशेष समय माना गया है। इस दौरान कुछ कार्य करना शुभ और कुछ अशुभ माना जाता है। मन की शांति के लिए आप इन सामान्य नियमों का पालन कर सकते हैं:

क्या करें?

मंत्र जाप: ग्रहण काल ​​मंत्र सिद्धि के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इस दौरान आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं या सूर्य देव के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
दान-पुण्य: ग्रहण के बाद दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। चूँकि यह सर्व पितृ अमावस्या का दिन भी है, इसलिए इस दिन किए गए दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
ध्यान: यह समय ध्यान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत उत्तम है।

क्या न करें? (ये नियम भारत में लागू नहीं हैं)

  • शास्त्रों के अनुसार, जहाँ ग्रहण दिखे, वहाँ खाना पकाने या खाने से बचना चाहिए।
  • इस दौरान पूजा घर में भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  • कोई भी नया या शुभ काम शुरू नहीं करना चाहिए।

संक्षेप में कहें तो, कल का सूर्य ग्रहण भारत के लोगों के लिए सिर्फ़ एक खगोलीय घटना है। आपको किसी भी तरह से डरने या अपनी दिनचर्या बदलने की ज़रूरत नहीं ਹੈ। आप पूरे मन से अपने पितरों को याद करें और उनकी विदाई की पूजा संपन्न करें।