Shubh Muhurat : शारदीय नवरात्रि 2025 हवन का पूरा नियम, जानें सामग्री और सही समय, चमकेगी किस्मत
News India Live, Digital Desk: Shubh Muhurat : आपने जिस लेख के लिए सामग्री का अनुरोध किया है, वह शारदीय नवरात्रि 2025 में हवन, दुर्गा अष्टमी और नवमी से संबंधित है, और इस पर पहले ही सामग्री बनाई जा चुकी है. यहाँ उसी लेख का संशोधित और हिंदी में प्राकृतिक, बातचीत शैली में लिखा गया संस्करण, SEO कीवर्ड और क्लिक-योग्य शीर्षकों के साथ प्रस्तुत है:
शारदीय नवरात्रि (Sharad Navratri) का पर्व हर साल हम सबके जीवन में नई उमंग और मां दुर्गा का आशीर्वाद लेकर आता है. यह नौ दिन मां शक्ति की उपासना और भक्ति के होते हैं, और इस दौरान हवन का एक खास महत्व है. हवन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है. अगर आप भी सोच रहे हैं कि आने वाली शारदीय नवरात्रि 2025 में दुर्गा अष्टमी (Durga Ashtami) और महा नवमी (Maha Navami) पर कब और कैसे हवन करें, तो यह जानकारी आपके लिए है.
हवन सिर्फ अग्नि में आहुति देना नहीं, बल्कि यह अपनी भक्ति, कृतज्ञता और सकारात्मक ऊर्जा को ब्रह्मांड तक पहुंचाने का एक जरिया है. हवन के जरिए हम पर्यावरण को भी शुद्ध करते हैं और मां दुर्गा की कृपा से अपने घर में सुख-समृद्धि लाते हैं.
नवरात्रि 2025: दुर्गा अष्टमी और नवमी कब?
साल 2025 में, शारदीय नवरात्रि सोमवार, 22 सितंबर से शुरू होगी.
- दुर्गा अष्टमी: यह मंगलवार, 30 सितंबर, 2025 को पड़ेगी. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. कई लोग अष्टमी पर हवन करते हैं.
- महानवमी: यह बुधवार, 1 अक्टूबर, 2025 को होगी. नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. ज्यादातर घरों और मंदिरों में महा नवमी पर हवन किया जाता है. नवमी तिथि 30 सितंबर को शाम 6:06 बजे शुरू होगी और 1 अक्टूबर को शाम 7:01 बजे समाप्त होगी.
हवन का शुभ मुहूर्त हमेशा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए एक बार अपने क्षेत्र के पंचांग की भी सलाह ज़रूर लें. आमतौर पर हवन दिन के समय नवमी तिथि रहते हुए ही किया जाता है.
हवन सामग्री: क्या-क्या चाहिए?
हवन करने के लिए आपको इन सामान्य सामग्रियों की ज़रूरत होगी:
- हवन कुंड: यह मुख्य होता है, जिसमें अग्नि प्रज्जवलित की जाती है.
- समितियां (लकड़ियाँ): आम की सूखी लकड़ी सबसे अच्छी मानी जाती है. पलाश, गूलर, बबूल आदि की लकड़ी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
- शुद्ध गाय का घी: आहुति के लिए.
- हवन सामग्री: बाज़ार में तैयार हवन सामग्री मिलती है, जिसमें जौ, तिल, चावल, शक्कर, गूगल, लोबान, कपूर आदि चीज़ें मिली होती हैं.
- कपूर और माचिस: अग्नि प्रज्जवलित करने के लिए.
- सूखा नारियल (गोला): इसे 'पूर्णाहुति' में इस्तेमाल करते हैं.
- पूजन सामग्री: गंगाजल, रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), पुष्प, फल, मिठाई, मौली धागा, पंचमेवा.
- पात्र: जल रखने के लिए और घी आदि रखने के लिए.
- यज्ञोपवीत: जनेऊ (यदि धारण करते हों).
- नैवेद्य: माँ को चढ़ाने के लिए हलवा, चना, पूड़ी आदि.
हवन करने की विधि (Havan Vidhi):
- स्थान की शुद्धि: सबसे पहले हवन करने वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें.
- हवन कुंड स्थापना: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में हवन कुंड रखें.
- अग्नि स्थापना: हवन कुंड में लकड़ी रखकर कपूर की मदद से अग्नि प्रज्जवलित करें. 'ओउम अग्नेय नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए अग्नि देव का आवाहन करें.
- मंत्रोच्चारण और आहुतियां: 'ओउम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' या दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप करते हुए हवन सामग्री में घी मिलाकर 108 आहुतियां दें. आप दुर्गा मां के हर रूप के लिए भी मंत्रोच्चारण कर सकते हैं.
- पूर्णाहुति: जब आहुतियां पूरी हो जाएं, तब एक सूखा नारियल लें. उसमें थोड़ा सा घी और हवन सामग्री भरकर मौली धागा लपेट दें. सभी देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए 'ओउम सर्व देव-देवीभ्यो नमः स्वाहा' मंत्र बोलते हुए इस नारियल को हवन की अग्नि में अर्पित कर दें. यह 'पूर्णाहुति' होती है, जो हवन के सफल समापन का प्रतीक है.
- आरती: हवन संपन्न होने के बाद, कपूर से मां दुर्गा की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करें.
- प्रदक्षिणा: हवन कुंड की तीन या सात परिक्रमा करें.
- कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन हवन के बाद कन्या पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है. नौ छोटी कन्याओं (2 से 10 वर्ष की) को भोजन कराएं, दक्षिणा दें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें.
हवन से निकलने वाला धुआं और मंत्रों का जाप आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाता है. सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया हवन आपके जीवन में खुशहाली और मां दुर्गा का आशीर्वाद ज़रूर लाएगा.