
इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में भारत की कुछ बड़ी कंपनियों पर कर मांग और जुर्माने के आदेश जारी किए हैं, जिनमें तकनीकी सेवा प्रदाता बॉश लिमिटेड, निजी क्षेत्र का यस बैंक और प्रमुख एयरलाइन इंडिगो शामिल हैं। इन आदेशों ने न केवल कंपनियों को चौंकाया है बल्कि निवेशकों और बाजार पर भी असर डाला है। आइए जानते हैं तीनों मामलों की पूरी कहानी—
बॉश लिमिटेड को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का नोटिस
प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में अग्रणी कंपनी बॉश लिमिटेड को आकलन वर्ष 2022-2023 के लिए इनकम टैक्स विभाग की ओर से एक भारी-भरकम कर मांग नोटिस जारी किया गया है। कंपनी को 28 मार्च 2025 को यह कर निर्धारण नोटिस मिला जिसमें विभाग ने ₹18.36 करोड़ की टैक्स डिमांड और ₹1.80 करोड़ का ब्याज जोड़ते हुए कुल मांग ₹20 करोड़ से ज्यादा की कर दी है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह नोटिस विभाग की मूल्यांकन इकाई द्वारा पास किया गया है। बॉश लिमिटेड ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश के खिलाफ अपील करने की दिशा में काम कर रही है और जुर्माने की अंतिम राशि अभी तय नहीं हुई है।
यस बैंक को ₹2,209 करोड़ का टैक्स डिमांड नोटिस
यस बैंक को आयकर विभाग की ओर से सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसे ₹2,209.17 करोड़ का टैक्स डिमांड नोटिस प्राप्त हुआ। इस नोटिस में ब्याज की रकम भी शामिल है। बैंक ने बताया कि उसे यह नोटिस 30 सितंबर 2021 को पहले दाखिल किए गए टैक्स रिटर्न के बाद रिफंड मिलने के बावजूद मिला।
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब अप्रैल 2023 में इनकम टैक्स विभाग ने केस को दोबारा खोलने का निर्णय लिया। उसके बाद, 28 मार्च को नेशनल फेसलेस असेसमेंट यूनिट ने पुनर्मूल्यांकन आदेश पास किया। यस बैंक का कहना है कि वह इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देने की योजना बना रहा है और उसका मानना है कि इससे बैंक की वित्तीय स्थिति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
इंडिगो पर ₹944 करोड़ का जुर्माना
देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन कंपनी इंडिगो, जिसकी मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन है, को भी इनकम टैक्स विभाग ने 944.20 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। यह आदेश कंपनी को शनिवार को मिला, और इसके जवाब में इंडिगो ने रविवार को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करते हुए कहा कि यह जुर्माना पूरी तरह से अनुचित और गलत है।
इंडिगो का कहना है कि वह इस आदेश को चुनौती देने की प्रक्रिया में है। जुर्माना आकलन वर्ष 2021-22 से संबंधित है और इसे आयकर विभाग की आकलन इकाई ने पास किया है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह सभी वैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल कर अपने हितों की रक्षा करेगी।
क्या कहता है यह सब?
इन तीनों मामलों से साफ है कि इनकम टैक्स विभाग अब कंपनियों के पुराने टैक्स रिकॉर्ड को भी गंभीरता से खंगाल रहा है और किसी भी गड़बड़ी पर सख्त रुख अपना रहा है। जहां बॉश और यस बैंक जैसे दिग्गज इस आदेश के खिलाफ अपील की तैयारी में हैं, वहीं इंडिगो ने सीधे तौर पर जुर्माने को खारिज कर दिया है।
इन मामलों की अंतिम परिणति क्या होगी, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन इससे एक बात जरूर साफ हो जाती है—सरकार टैक्स मामलों में अब किसी को भी रियायत देने के मूड में नहीं है।