बच्चों में बढ़ते मोबाइल के नशे पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, स्कूलों में चलेगा खास अभियान

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News India Live, Digital Desk: आज लगभग हर घर में एक आम समस्या है- बच्चे मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं। गेमिंग, सोशल मीडिया और वीडियो देखने की आदत ने बच्चों को खेल के मैदान और किताबों से दूर कर दिया है, जिसका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस गंभीर होती समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा और जरूरी कदम उठाया है। अब प्रदेश के प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के सभी स्कूलों में बच्चों को मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।

क्या है सरकार का 'डिजिटल डिटॉक्स' प्लान?

इस अभियान का मकसद बच्चों को स्क्रीन की दुनिया से निकालकर असल दुनिया की गतिविधियों से जोड़ना है। इसके लिए एक comprehensive प्लान तैयार किया गया है, जो बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी इस मुहिम का हिस्सा बनाएगा।

1. छोटे बच्चों के लिए खेल-कूद पर जोर
प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए पारंपरिक भारतीय खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा। स्कूलों में अब कबड्डी, खो-खो, लंगड़ी टांग और पिट्ठू जैसे खेल नियमित रूप से खिलाए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में शारीरिक सक्रियता को बढ़ाना और टीम भावना का विकास करना है, ताकि उनका ध्यान मोबाइल से हटकर खेल के मैदान की ओर लगे।

2. 'बैगलेस डे' पर होगी खास क्लास
नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में होने वाले 'बैगलेस डे' का इस्तेमाल अब बच्चों को जागरूक करने के लिए किया जाएगा। इस दिन बच्चों को मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में:

  • चित्रकला प्रतियोगिता: बच्चे मोबाइल की लत के दुष्प्रभावों पर पेंटिंग बनाएंगे।
  • निबंध और वाद-विवाद: इस विषय पर निबंध और डिबेट कराए जाएंगे ताकि बच्चे खुद इस पर सोचें और बोलें।
  • नाटक और स्लोगन: नुक्कड़ नाटक और स्लोगन लेखन जैसी गतिविधियों से रोचक तरीके से जागरूकता फैलाई जाएगी।

3. माता-पिता और शिक्षकों की भी होगी जिम्मेदारी
यह अभियान सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूल स्तर पर होने वाली शिक्षक-अभिभावक बैठकों (Parent-Teacher Meetings) में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। माता-पिता को बताया जाएगा कि वे घर पर बच्चों के स्क्रीन टाइम को कैसे नियंत्रित करें। इसके अलावा, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए "डिजिटल डिटॉक्स" पर काउंसलिंग और वर्कशॉप भी आयोजित की जाएंगी।

इस अभियान की निगरानी के लिए हर स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा, जो इन गतिविधियों की देखरेख करेगा और इसकी रिपोर्ट आगे भेजेगा। सरकार का यह कदम बच्चों के बेहतर भविष्य और उनके संपूर्ण विकास के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण पहल है।