PoK में फिर भड़की हिंसा की आग: शुबाज़ाबाद में फायरिंग से 2 युवकों की मौत, मुज़फ़्फ़राबाद सरकार के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर हिंसा, तनाव और गंभीर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। ताजा इनपुट्स के अनुसार, PoK के शुबाज़ाबाद क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित फायरिंग में दो स्थानीय कश्मीरी युवकों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है और मुज़फ़्फ़राबाद से लेकर कई प्रमुख शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की दमनकारी सुरक्षा एजेंसियों और मुज़फ़्फ़राबाद की कठपुतली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
"हत्या के लिए मुज़फ़्फ़राबाद सरकार और पाक एजेंसियां जिम्मेदार"
घटना के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे संगठनों की ओर से एक संयुक्त आक्रोश बयान जारी किया गया है।
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सीधा आरोप: बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि निर्दोष युवकों पर गोलीबारी करने और उनकी जान लेने के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान की बर्बर सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार है।
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असंवेदनशीलता का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने दुख जताते हुए कहा कि ठीक एक महीने पहले PoK में हुई हिंसक झड़पों के दौरान मारे गए लोगों के शवों के अवशेष आज तक उनके पीड़ित परिजनों को नहीं सौंपे गए हैं। सरकार और सुरक्षा बल मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।
चुनावी तैयारियों में व्यस्त सत्ताधीश, जनता में भयंकर उबाल
नागरिकों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब पूरा PoK बुनियादी सुविधाओं की कमी, महंगाई और सुरक्षा बलों के अत्याचार से कराह रहा है, तब वहां की सरकार जनता के घावों पर मरहम लगाने के बजाय राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुज़फ़्फ़राबाद में बैठी सरकार पूरे घटनाक्रम और जनता की चीख-पुकार को पूरी तरह नजरअंदाज कर आगामी स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की जोड़-तोड़ में व्यस्त है, जिससे साफ पता चलता है कि उन्हें स्थानीय आवाम की जान की कोई कीमत नहीं है।
"शहीदों के खून का हिसाब होगा, अल्टीमेटम हुआ खत्म"
आंदोलनकारियों ने मुज़फ़्फ़राबाद सरकार और पाकिस्तानी हुक्मरानों को खुली चेतावनी देते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है:
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हिसाब लिया जाएगा: प्रदर्शनकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि मारे गए बेकसूर शहीदों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा और इस दमन को कश्मीरी आवाम कभी नहीं भुलाएगी।
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अल्टीमेटम समाप्त: नेताओं ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को अपनी नीतियां सुधारने के लिए दिया गया अल्टीमेटम अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब बातचीत का समय खत्म है और जल्द ही एक विशाल जन-आंदोलन के अगले चरण की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
थमने नहीं देंगे संघर्ष: आंदोलनकारी नेताओं का आह्वान
PoK में चल रहे इस नागरिक अधिकार आंदोलन से जुड़े शीर्ष नेताओं ने अपने समर्थकों और आम जनता से लगातार सड़कों पर बने रहने और संघर्ष को जारी रखने की भावुक अपील की है। नेताओं ने कहा, "पाकिस्तानी हुकूमत और उनकी एजेंसियां हमारे ऊपर चाहे जितने जुल्म ढा लें या रास्ते में कितनी भी बाधाएं खड़ी करें, यह आंदोलन अब अपने मुकाम तक पहुंचे बिना रुकने वाला नहीं है। विरोध प्रदर्शन अपने निर्धारित लक्ष्य (अधिकारों की प्राप्ति) तक लगातार जारी रहेंगे।"
पाक सरकार की चुप्पी: फिलहाल इस पूरे संवेदनशील मामले और दो युवकों की मौत पर न तो पाकिस्तान की मुख्य केंद्र सरकार और न ही मुज़फ़्फ़राबाद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने आई है। पूरे शुबाज़ाबाद और आस-पास के क्षेत्रों को सुरक्षा बलों ने छावनी में तब्दील कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा उफान पर है।