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वेनेजुएला तो सिर्फ झांकी है, ये हैं दुनिया के 5 सबसे हाहाकारी भूकंप जब पल भर में तबाह हो गए थे पूरे देश

वेनेजुएला में आए हालिया विनाशकारी भूकंप ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। प्रकृति के इस रौद्र रूप को देखकर हर कोई सहमा हुआ है, लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यह तो सिर्फ एक झांकी है। धरती के भीतर होने वाली हलचल ने अतीत में कई बार ऐसा तांडव मचाया है जिससे बड़े-बड़े देशों का भूगोल और इतिहास हमेशा के लिए बदल गया। आज हम आपको दुनिया के उन 5 सबसे खतरनाक और महाविनाशकारी भूकंपों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके सामने आते ही इंसानी सभ्यता पूरी तरह बेबस नजर आई थी।

चिली का महाभूकंप: जब रिक्टर स्केल पर मापी गई इतिहास की सबसे बड़ी तीव्रता

साल 1960 में दक्षिण अमेरिकी देश चिली में आया भूकंप विज्ञान के इतिहास में अब तक का सबसे भीषण भूगर्भीय झटका माना जाता है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता रिकॉर्ड 9.5 मापी गई थी। इस भूकंप ने न सिर्फ चिली में तबाही मचाई, बल्कि इसके कारण प्रशांत महासागर में उठी भयानक सूनामी की लहरों ने जापान, फिलीपींस और हवाई तक में भारी तबाही दर्ज की थी। धरती फटने और समंदर के उबलने का ऐसा खौफनाक मंजर दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था।

अलास्का का जलजला: जब मिनटों तक कांपती रही पूरी धरती

साल 1964 में अमेरिका के अलास्का में आया भूकंप तीव्रता के मामले में दूसरे नंबर पर आता है। 9.2 की तीव्रता वाले इस भीषण जलजले ने करीब साढ़े चार मिनट तक लगातार धरती को हिलाकर रख दिया था। इस भूकंप की वजह से आई सूनामी और भूस्खलन ने कई तटीय कस्बों का नामोनिशान मिटा दिया था। गनीमत यह थी कि यह इलाका कम आबादी वाला था, वरना मौतों का आंकड़ा लाखों में पहुंच सकता था।

सुमात्रा इंडोनेशिया: हिंद महासागर की वो काली सुबह जिसने भारत को भी रुलाया

26 दिसंबर 2004 की वो सुबह कोई नहीं भूल सकता, जब इंडोनेशिया के सुमात्रा के पास समंदर के भीतर 9.1 तीव्रता का महाभूकंप आया। इस भूकंप के बाद हिंद महासागर में उठी दैत्याकार सूनामी की लहरों ने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित 14 देशों में मौत का तांडव मचाया था। इस त्रासदी में करीब 2 लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसमें भारत के तटीय इलाके भी बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

तोहोकू जापान: जब परमाणु रिएक्टर तक संकट में पड़ गए थे

टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया के सबसे एडवांस देशों में शुमार जापान को साल 2011 में प्रकृति के सबसे क्रूर चेहरे का सामना करना पड़ा था। तोहोकू में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई विनाशकारी सूनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस आपदा ने साबित कर दिया था कि इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, कुदरत के कहर के आगे सब कुछ बौना है।

कामचटका रूस: जब सोवियत संघ के इस हिस्से में डोली थी धरती

साल 1952 में रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के कामचटका प्रायद्वीप में 9.0 तीव्रता का एक बेहद शक्तिशाली भूकंप आया था। इस भूकंप ने भी प्रशांत महासागर में बड़े पैमाने पर सूनामी की लहरें पैदा की थीं, जिसका असर हजारों किलोमीटर दूर हवाई द्वीपों तक देखा गया था। यह भूकंप इतना ताकतवर था कि इसने स्थानीय भौगोलिक संरचना को पूरी तरह से विकृत कर दिया था।

एआई और आधुनिक भूगर्भ विज्ञान की नजर में भूकंप के बदलते पैटर्न

आज के आधुनिक दौर में जेनेरेटिव एआई और एडवांस सिस्मोलॉजी (भूकंप विज्ञान) की मदद से वैज्ञानिक टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल को समझने की कोशिश कर रहे हैं। वेनेजुएला की ताजा घटना के बाद दुनिया भर के भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि पैसिफिक रिंग ऑफ फायर और एक्टिव फॉल्ट लाइन्स वाले क्षेत्रों में रहने वाले देशों को हमेशा हाई अलर्ट पर रहना होगा, क्योंकि भूकंप एक ऐसी आपदा है जिसकी सटीक भविष्यवाणी आज भी इंसानी तकनीक के दायरे से बाहर है।

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