लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS वाशिंगटन खुद हुआ बीमार
दुनिया की सबसे ताकतवर और अत्याधुनिक सैन्य ताकत होने का दावा करने वाली अमेरिकी नौसेना (United States Navy) के भीतर से एक ऐसी शर्मनाक और हैरान करने वाली हकीकत सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी युद्धपोत [USS Washington] को समंदर में किसी बड़े मिशन पर तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए रवाना किया गया था, वहीं खुद यह युद्धपोत तकनीकी और प्रशासनिक बदहाली के कारण गंभीर संकट में घिर गया है। इस युद्धपोत के अंदर की जो तस्वीरें और रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उन्होंने नौसेना के भीतर मचे आंतरिक हाहाकार को उजागर कर दिया है। पोत पर तैनात सैनिकों, विशेषकर महिला नौसैनिकों को जिन अमानवीय और दयनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, उसने अमेरिकी सैन्य प्रबंधन [Military Management] की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टॉयलेट और स्वच्छता के बदतर हालात से सैनिक परेशान
USS वाशिंगटन जैसे विशाल और आधुनिक युद्धपोत पर बुनियादी सुविधाओं का इस हद तक लावारिस हाल होना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पोत पर तैनात क्रू मेंबर्स और अधिकारियों के अनुसार, जहाज के अंदर बने अधिकांश टॉयलेट और सैनिटेशन सिस्टम पिछले काफी समय से पूरी तरह से खराब या जाम पड़े हैं। सीवर लाइन और प्लंबिंग फेल होने के कारण पोत के भीतर असहनीय बदबू और अस्वच्छ माहौल बन चुका है, जिससे सैनिकों के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। समंदर की बीच लहरों के बीच लंबे अभियानों पर रहने वाले नौसैनिकों के लिए साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे पहली जरूरत होती है, लेकिन जब युद्धपोत के टॉयलेट ही काम करना बंद कर दें, तो सैनिकों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों चरमराने लगता है। प्रशासनिक लापरवाही की यह पराकाष्ठा है कि महासागर की गहराइयों में गश्त लगाने वाले इन जांबाज सैनिकों को बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
महिला सैनिकों के सामने विकराल संकट और सैनिटरी पैड तक की कमी
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू यह है कि युद्धपोत पर तैनात महिला सैनिकों (Female Sailors) को अपनी बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता जरूरतों के लिए भी भारी अपमान और संकट का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्धपोत पर एमरजेंसी मेडिकल सप्लीमेंट्स और आवश्यक सैनिटरी प्रोडक्ट्स [Sanitary Pads] का भारी अकाल पड़ चुका है, जिसके चलते महिला सैनिकों को पीरियड्स के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस देश की सेना दुनिया भर में मानवाधिकारों और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े उपदेश देती है, उसी देश के युद्धपोत पर सेवारत महिला नौसैनिकों को बुनियादी सैनिटरी पैड जैसी सामान्य वस्तुएं तक उपलब्ध न करा पाना रक्षा मंत्रालय और नौसेना कमान की बड़ी विफलता को दर्शाता है। महिला सैनिकों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि एक तरफ उन्हें पुरुषों के बराबर युद्धक मोर्चों पर तैनात किया जाता है, लेकिन जब मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की बात आती है, तो उन्हें पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।
तकनीकी खराबी और लॉजिस्टिक्स की भयंकर विफलता
अमेरिकी नौसेना के इन युद्धपोतों के संचालन के पीछे अरबों-खरबों डॉलर का बजट होता है, इसके बावजूद इस तरह की रसद और तकनीकी विफलताएं [Logistics Failures] यह साबित करती हैं कि जमीनी स्तर पर प्रबंधन कितना खोखला हो चुका है। USS वाशिंगटन जब लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला था, तो उम्मीद यह की जा रही थी कि यह पोत युद्ध के मोर्चों पर एक मजबूत बैकअप साबित होगा, लेकिन खुद अपने ही आंतरिक रख-रखाव के मोर्चे पर यह पोत चित्कार उठा। जहाजों के इंजनों की तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ समय पर स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति न होना इस बात का प्रमाण है कि रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Defense Supply Chain) में गंभीर खामियां आ चुकी हैं। नौसेना अधिकारियों द्वारा इस मामले को दबाने और छिपाने के तमाम प्रयास किए गए, लेकिन जब पीड़ित सैनिकों ने अपनी आपबीती मीडिया और मानवाधिकार मंचों तक पहुंचाई, तो पोल खुल गई।
अमेरिकी सेना की साख को बट्टा और जवाबदेही की मांग
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अमेरिका के रक्षा विभाग [Pentagon] और नौसेना मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों और सांसदों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने की मांग की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किस स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई जिसके कारण देश की रक्षा करने वाले सैनिक खुद नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हुए। युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के परिवारों में भी भारी रोष व्याप्त है, जो यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सरकार सैनिकों की जान और उनकी गरिमा के साथ इसी तरह खिलवाड़ करती रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस होने की पूरी संभावना है, क्योंकि इस घटना ने दुनिया के सबसे बड़े सुपरपॉवर की सैन्य तैयारियों के खोखलेपन को सबके सामने बेनकाब कर दिया है।