कारोबारी बनकर बीजिंग में सेंध लगाएंगे अमेरिकी एजेंट, वाशिंगटन पोस्ट का सनसनीखेज खुलासा

कारोबारी बनकर बीजिंग में सेंध लगाएंगे अमेरिकी एजेंट, वाशिंगटन पोस्ट का सनसनीखेज खुलासा

दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच चल रहा रणनीतिक और तकनीकी टकराव अब एक बेहद गुप्त और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच वैश्विक प्रभुत्व की होड़ के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग 'पेंटागन' चीन के खिलाफ एक नए और व्यापक जासूसी अभियान की रूपरेखा तैयार कर रहा है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र 'द वाशिंगटन पोस्ट' की एक विस्फोटक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन चीन के आर्थिक और सामरिक तंत्र में गहरी सेंध लगाने के लिए एक अभूतपूर्व गुप्त खुफिया नेटवर्क स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इस योजना की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके तहत अमेरिकी सैन्य और रक्षा खुफिया एजेंट किसी राजनयिक या सरकारी अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े कारोबारी, निवेशक और निजी क्षेत्र के शीर्ष कर्मचारियों की गुप्त पहचान (डीप-कवर आइडेंटिटी) के साथ काम करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर कोई जासूस पकड़ा भी जाए या कोई अभियान बेनकाब हो, तो उसका सीधा संबंध अमेरिकी रक्षा विभाग या सरकार से सार्वजनिक रूप से उजागर न हो सके। हालांकि पेंटागन के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इस पूरी खबर को सिरे से खारिज करते हुए गलत बताया है, लेकिन रिपोर्ट से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है।

कारोबारी मुखौटे के पीछे छिपे होंगे जासूस: चीन की आर्थिक ताकत और सप्लाई चेन पर चोट करने का इरादा

वाशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट में मामले से सीधे तौर पर जुड़े छह शीर्ष अमेरिकी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित जासूसी कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य चीन और अमेरिका के अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ उच्च स्तरीय आर्थिक खुफिया जानकारी जुटाना है। यह गुप्त पहल फिलहाल रणनीतिक योजना बनाने के शुरुआती चरण में है और इसे मैदानी स्तर पर पूरी तरह सक्रिय नहीं किया गया है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में युद्ध केवल तोपों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर चिप्स, रणनीतिक खनिजों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नियंत्रण के जरिए लड़े जा रहे हैं। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए पेंटागन यह चाहता है कि उसके प्रशिक्षित खुफिया ऑपरेटर चीनी बाजारों, औद्योगिक केंद्रों और राज्य समर्थित प्रौद्योगिकी कंपनियों के भीतर निजी कारोबारियों की तरह घुल-मिल जाएं। निजी कंपनियों के निदेशक, सलाहकार या तकनीकी प्रतिनिधि बनकर ये जासूस उन संवेदनशील आर्थिक नीतियों, दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के गुप्त भंडार और रक्षा आपूर्ति से जुड़े प्रोजेक्ट्स की अंदरूनी जानकारियां जुटाएंगे, जिन तक पारंपरिक खुफिया तंत्र या सैटेलाइट निगरानी से पहुंचना असंभव होता है।

सीआईए के 39 साल पुराने महारथी के हाथ में कमान: टॉम राकुसन और स्टीव फाइनबर्ग तैयार कर रहे खाका

द वाशिंगटन पोस्ट के खुलासे के मुताबिक, इस पूरे अति-गोपनीय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और इसके संचालन की देखरेख का जिम्मा सीआईए के एक अनुभवी पूर्व अधिकारी टॉम राकुसन को सौंपा गया है। राकुसन ने सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी में 39 वर्षों तक सेवा दी है और वे शीत युद्ध से लेकर आधुनिक डिजिटल जासूसी अभियानों के सबसे बड़े विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। वर्तमान समय में टॉम राकुसन अमेरिकी उप रक्षा मंत्री स्टीव फाइनबर्ग के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। इस बहुआयामी मिशन को अमलीजामा पहनाने के लिए राकुसन ने अमेरिकी सेना की विभिन्न शाखाओं, रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) के वरिष्ठ अधिकारियों और सीआईए के पूर्व फील्ड ऑपरेटरों की एक विशिष्ट कोर टीम तैयार की है। हालांकि अभी तक इस बात को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर कानूनी और ढांचागत मंथन चल रहा है कि क्या इस कार्यक्रम के लिए रक्षा विभाग के भीतर एक बिल्कुल नई खुफिया इकाई का गठन किया जाएगा या फिर पहले से मौजूद डिफेंस कोवर्ट ऑपरेशंस के दायरे को ही नया विस्तार दिया जाएगा। चौंकाने वाली बात यह भी है कि अमेरिकी संसद यानी कैपिटल हिल की खुफिया समितियों को भी इस कार्यक्रम की औपचारिक जानकारी दिए जाने के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।

पेंटागन ने रिपोर्ट को बताया भ्रामक: कानूनी अधिकारों और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के कार्यक्षेत्र पर उठे सवाल

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अमेरिकी सरकार के भीतर रक्षा विभाग और नागरिक खुफिया संस्थाओं के बीच क्षेत्राधिकार की खींचतान तेज हो गई है। जब वाशिंगटन पोस्ट ने इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी, तो पेंटागन के उप प्रेस सचिव जैकब ब्लिस ने दो-टूक शब्दों में कहा कि रिपोर्ट में किए गए दावे भ्रामक और गलत जानकारी पर आधारित प्रतीत होते हैं। वहीं सीआईए ने इस विषय पर कोई भी औपचारिक टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया और योजना के सूत्रधार माने जा रहे टॉम राकुसन ने भी मीडिया के सवालों पर चुप्पी साध ली। अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि पेंटागन अपने सैन्य कर्मियों को कारोबारी बनाकर वाणिज्यिक जासूसी में उतारता है, तो यह पारंपरिक 'टाइटल 10' (सैन्य संचालन) और 'टाइटल 50' (खुफिया संचालन) के कानूनी विभाजन का गंभीर उल्लंघन हो सकता है। आमतौर पर विदेशों में जासूसी और गुप्त अभियानों को अंजाम देने का एकमात्र कानूनी अधिकार नागरिक खुफिया एजेंसी सीआईए के पास होता है। ऐसे में सेना द्वारा वाणिज्यिक मुखौटे का इस्तेमाल पकड़े जाने पर न केवल राजनयिक संकट खड़ा करेगा, बल्कि विदेशों में काम कर रहे वैध अमेरिकी निजी व्यापारियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारियों के जीवन को भी गंभीर जोखिम में डाल देगा।

ट्रंप प्रशासन का आर्थिक दबाव और एआई-बायोटेक पर नजर: चीन के खिलाफ शीत युद्ध 2.0 का नया अखाड़ा

विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह घटनाक्रम अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में आए उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसके तहत आर्थिक दबाव को सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका पहले से ही चीन पर कड़े आयात शुल्क (टैरिफ), उन्नत चिप तकनीक पर निर्यात प्रतिबंध और रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश पर रोक लगाने जैसी आक्रामक नीतियां लागू कर चुका है। अब इस आर्थिक युद्ध को खुफिया मजबूती देने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले सीआईए के उप निदेशक माइकल एलिस ने सितंबर में सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि अमेरिका चीन के खिलाफ अपने जासूसी तंत्र का अभूतपूर्व विस्तार कर रहा है। माइकल एलिस के मुताबिक, अमेरिका का मुख्य ध्यान अब पारंपरिक सैन्य ठिकानों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) और नेक्स्ट-जेनरेशन एडवांस सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे तकनीकी क्षेत्रों में चीन की गुप्त प्रगति और जासूसी को बेअसर करने पर केंद्रित है। यदि पेंटागन का यह गुप्त कमर्शियल प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो यह आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा करेगा और इसे 'कोल्ड वॉर 2.0' के सबसे आक्रामक अध्याय के रूप में देखा जाएगा।