भारत के कड़े विरोध को दरकिनार कर PoK पहुंचीं अमरीकी कार्यवाहक राजदूत नताली बेकर
कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भारत की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और कड़े कूटनीतिक विरोध को पूरी तरह दरकिनार करते हुए पाकिस्तान में तैनात अमरीकी कार्यवाहक राजदूत नताली बेकर ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का विवादित दौरा किया है। नताली बेकर ने मुजफ्फराबाद और आसपास के क्षेत्रों का दौरा कर वहां कई स्थानीय अधिकारियों, व्यापारिक मंडलों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। भारत हमेशा से पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अपना अभिन्न अंग मानता आया है और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में किसी भी विदेशी राजनयिक की ऐसी गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताता रहा है। अमरीकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी के इस कदम से नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के बीच खासी नाराजगी और हलचल देखी जा रही है। इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया में अमरीकी विदेश नीति के बदले रुख और बीजिंग-इस्लामाबाद-वाशिंगटन के बीच बनते-बिगड़ते नए क्षेत्रीय सामरिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमरीकी राजदूत नताली बेकर का मुजफ्फराबाद दौरा और भारतीय संप्रभुता पर बड़ा कूटनीतिक विवाद
पाकिस्तान में अमरीका के दूतावास की कमान संभाल रहीं कार्यवाहक राजदूत (चार्ज डी अफेयर्स) नताली बेकर ने हाल ही में पाक अधिकृत कश्मीर यानी PoK का दौरा किया। आधिकारिक तौर पर इस यात्रा को अमरीकी सहायता पहलों, बाढ़ राहत समीक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाओं और व्यापारिक संवाद का हिस्सा बताया गया है। बेकर ने मुजफ्फराबाद में वहां के स्थानीय प्रशासकों और पाकिस्तान समर्थित प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। हालांकि, रणनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के दौरे किसी भी विदेशी दूतावास के लिए केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके गहरे कूटनीतिक मायने होते हैं। भारत ने अतीत में भी जब कभी अमरीकी या किसी अन्य देश के अधिकारियों ने PoK का दौरा किया है, तो उस पर सख्त कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। भारत की ओर से बार-बार यह स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला पूरा इलाका भारत का आंतरिक व कानूनी हिस्सा है, इसलिए वहां किसी भी देश के प्रतिनिधि की आधिकारिक मौजूदगी भारत की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन मानी जाएगी।
वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच सुधरते रिश्तों के बीच भारत की चिंताएं और क्षेत्रीय कूटनीति
यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ अमरीकी राजनयिक ने भारत की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए PoK का रुख किया हो। इससे पूर्व भी अमरीका के पूर्व राजदूत डोनाल्ड ब्लोम ने इस विवादित इलाके की यात्रा कर भारी विवाद खड़ा कर दिया था। अब नताली बेकर के इस कदम से यह साफ जाहिर होता है कि अमरीका अपने दक्षिण एशियाई संतुलन में पाकिस्तान को पूरी तरह दरकिनार नहीं करना चाहता। विशेषज्ञ इसे अमरीका की दोहरी कूटनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जहां एक तरफ वह भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के खिलाफ अपना सबसे मजबूत रणनीतिक साझेदार बताता है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान को खुश करने और वहां अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए इस तरह के संवेदनशील कदम उठाता है। इस्लामाबाद इस यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे पर अपना पक्ष मजबूत करने के रूप में पेश कर रहा है, जो नई दिल्ली के लिए किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति, चीन-पाक आर्थिक गलियारा और नई दिल्ली का सख्त रुख
इस पूरे मामले में चीन का कारक भी बेहद महत्वपूर्ण है। चीन सीपेक (CPEC) परियोजना के जरिए PoK में भारी निवेश कर चुका है, जिस पर भारत लगातार विरोध जताता रहा है। अमरीका भी चीन के इस बढ़ते प्रभाव से चिंतित रहता है, इसलिए वह अपने राजनयिकों के जरिए इस क्षेत्र में जमीनी स्थिति पर सीधी नजर रखना चाहता है। हालांकि, भारत के लिए मुद्दा अमरीका-चीन की प्रतिद्वंद्विता से ज्यादा अपनी भौगोलिक संप्रभुता का है। भारतीय विदेश मंत्रालय जल्द ही इस मुद्दे पर अमरीकी प्रशासन के सामने आधिकारिक रूप से कड़ा ऐतराज दर्ज करा सकता है। साउथ ब्लॉक के सूत्रों का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी आपसी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए और मित्र देशों को भारत की संप्रभुता से जुड़े बेहद संवेदनशील मुद्दों पर संयम बरतना चाहिए।