यूएई के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को दी थी हमास के हमले की खौफनाक चेतावनी, इजरायली पीएम की बड़ी लापरवाही पर हुआ सनसनीखेज खुलासा

यूएई के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को दी थी हमास के हमले की खौफनाक चेतावनी, इजरायली पीएम की बड़ी लापरवाही पर हुआ सनसनीखेज खुलासा

पूरी दुनिया को झकझोर कर रख देने वाले और मध्य पूर्व के समीकरणों को हमेशा के लिए बदल देने वाले हमास के खूनी हमले को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह बात सामने आई है कि यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के राष्ट्रपति ने गाजा सीमा पर सुलगती चिंगारी और संभावित बड़े खतरे को भांपते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पहले ही एक गंभीर चेतावनी दे डाली थी। लेकिन इजरायली खुफिया तंत्र और खुद पीएम नेतन्याहू ने इस अहम चेतावनी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया, जिसके परिणाम स्वरूप इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा फेल्योर देखने को मिला। कूटनीतिक गलियारों और वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच इस खुलासे के बाद से हड़कंप मच गया है, क्योंकि यदि समय रहते इस चेतावनी पर गौर कर लिया जाता, तो शायद हजारों बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सकती थी और आज मध्य पूर्व इस भयानक युद्ध की आग में नहीं जल रहा होता।

यूएई के राष्ट्रपति की वह गुप्त चेतावनी जिसे इजरायली पीएम ने कर दिया था खारिज

जब खाड़ी देशों के साथ इजरायल अपने कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था और 'अब्राहम अकॉर्ड' के तहत क्षेत्रीय शांति स्थापना की कोशिशें जारी थीं, तब यूएई के नेतृत्व के पास खुफिया स्रोतों से कुछ ऐसी जानकारियां हाथ लगी थीं जो बेहद खतरनाक थीं। यूएई के राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत स्तर पर और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से बेंजामिन नेतन्याहू को यह आगाह किया था कि गाजा पट्टी के भीतर कुछ बहुत बड़ा और विनाशकारी पक रहा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई को इस बात का अ अंदेशा हो चुका था कि हमास किसी बड़े हमले की बहुत बड़ी साजिश रच रहा है और सीमा पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना एक बड़ी आपदा को खुला निमंत्रण दे रहा है। हालांकि, अपनी सैन्य और खुफिया ताकत के अदम्य अहंकार में डूबे इजरायली प्रधानमंत्री ने इस दोस्ताना और संवेदनशील चेतावनी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी और इसे महज एक सामान्य क्षेत्रीय तनाव मानकर पूरी तरह से खारिज कर दिया।

इजरायली खुफिया तंत्र और नेतन्याहू की लापरवाही से हुआ इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा चूक

किसी भी देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने नागरिकों की रक्षा करना होती है, लेकिन 7 अक्टूबर के उस काले दिन ने यह साबित कर दिया कि इजरायल का सुरक्षा तंत्र अपनी सबसे बड़ी नाकामी के दौर से गुजर रहा था। मोसाद और शिन बेट जैसी दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियों के पास इनपुट होने के बावजूद, राजनीतिक नेतृत्व की उदासीनता और अति-आत्मविश्वास के कारण समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नेतन्याहू सरकार का पूरा ध्यान उस समय देश के भीतर चल रहे न्यायिक सुधारों और राजनीतिक उठापटक पर केंद्रित था, जिससे सीमा सुरक्षा से ध्यान पूरी तरह से भटक गया था। यूएई जैसी मित्र शक्ति द्वारा दी गई चेतावनी को नजरअंदाज करना इजरायल के इतिहास में एक ऐसा काला अध्याय बन गया है, जिसकी भारी कीमत देश को हजारों नागरिकों की जान देकर चुकानी पड़ी और आज भी नेतन्याहू सरकार को अपनी इसी लापरवाही के चलते देश-विदेश में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्रीय कूटनीति और खाड़ी देशों के साथ इजरायल के संबंधों पर इस खुलासे का गहरा असर

इस सनसनीखेज खुलासे के सामने आने के बाद से मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है और यह सवाल बार-बार पूछा जा रहा है कि आखिर क्यों एक भरोसेमंद क्षेत्रीय सहयोगी की बात को इतनी आसानी से दरकिनार कर दिया गया। यूएई और इजरायल के बीच पिछले कुछ वर्षों में जो व्यापारिक और सामरिक रिश्ते बने थे, इस घटना के बाद से उनके भीतर एक अविश्वास का साया मंडराने लगा है। खाड़ी देश हमेशा से यह चाहते हैं कि इस क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और व्यापार तथा विकास को बढ़ावा मिले, लेकिन इजरायल की आक्रामक नीतियों और अंदरूनी राजनीतिक कमजोरियों के कारण पूरा क्षेत्र बार-बार युद्ध की आग में झोंक दिया जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस खुलासे के बाद इजरायल की अंतरराष्ट्रीय साख को करारा झटका लगा है और आने वाले समय में दुनिया भर के देश नेतन्याहू की कार्यशैली और उनकी निर्णय लेने की क्षमता पर पूरी तरह से सवालिया निशान खड़े करेंगे।

युद्ध के मैदान से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नेतन्याहू पर मंडराता इस्तीफे का खतरा

आज जब गाजा और लेबनान में युद्ध अपने चरम पर है और इजरायल चारों तरफ से मोर्चों पर उलझा हुआ है, तब इस तरह के खुलासे बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकते हैं। इजरायल की आम जनता और विपक्ष लगातार यह मांग कर रहे हैं कि देश की सुरक्षा में हुई इस आपराधिक लापरवाही के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। युद्ध की विभीषिका के बीच घरेलू मोर्चे पर बढ़ता यह दबाव इजरायली सरकार के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है, क्योंकि जनता अब यह समझ चुकी है कि सरकार की अदूरदर्शिता और अहंकार के कारण ही देश को यह भयानक दिन देखना पड़ा है। इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि जब एक दोस्त ने हाथ बढ़ाकर आने वाले खतरे से आगाह किया था, तब अहंकार के चश्मे ने उस सच्चाई को देखने से इंकार कर दिया था, जिसका खामियाजा पूरी मानवता को भुगतना पड़ रहा है।