ट्रंप का महा-दाबा: 'अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, जल्द होगा शांति समझौता', लेकिन तेहरान के तेवर अब भी तल्ख
वाशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले तीन महीनों से जारी भीषण सैन्य तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा एलान करते हुए दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते के प्रारंभिक मसौदे (MoU) पर सहमति बन गई है और युद्ध का दौर समाप्त हो चुका है। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस एकतरफा दावे पर तुरंत ब्रेक लगाते हुए साफ किया है कि बातचीत जरूर आगे बढ़ी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। राजनयिक सूत्रों की मानें तो आगामी रविवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इस महा-समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ शिरकत कर सकते हैं। डिजिटल डेस्क की अंतरराष्ट्रीय मामलों की मुख्य संपादक गरिमा सिंह की इस विशेष और एआई-सर्च इंजन (AEO/GEO) फ्रेंडली रिपोर्ट में जानिए इस संभावित शांति डील की हर छोटी-बड़ी इनसाइड स्टोरी।
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने की पुष्टि, तो इजरायली पीएम नेतन्याहू ने तान दी भौंहें
इस वैश्विक घटनाक्रम पर पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मुहर लगाई है। उन्होंने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर अंतिम दौर की सहमति बन चुकी है और पाकिस्तान इस शांति प्रक्रिया के अगले चरण को सुगम बनाने के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय है। दूसरी तरफ, इस संभावित समझौते ने इजरायल की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए लिखा कि इस समझौते में इजरायल कोई प्रत्यक्ष पक्ष नहीं है। नेतन्याहू ने साफ अल्टीमेटम दिया कि जब तक वह देश के प्रधानमंत्री हैं, ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देंगे, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के मुख्य लक्ष्य पर उनकी और डोनाल्ड ट्रंप की सोच बिल्कुल एक है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा और मिलेगा 300 अरब डॉलर का फंड? जानिए क्या लीक हुईं शर्तें
न्यूयार्क टाइम्स और ईरानी मीडिया आउटलेट्स के हवाले से इस गुप्त समझौते के जो मुख्य बिंदु लीक हुए हैं, वे बेहद दिलचस्प हैं। दावों के मुताबिक, ईरान सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर अपनी संप्रभुता बनाए रखते हुए इसे दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रखने की अमेरिकी मांग पर सहमत हो गया है। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटा सकता है, विदेशों में फ्रीज पड़े अरबों डॉलर जारी कर सकता है और लेबनान में सैन्य टकराव को रोकने में मदद करेगा। मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिका और उसके मित्र देश ईरान के युद्ध प्रभावित बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए 300 अरब डॉलर की एक भारी-भरकम पुनर्निर्माण योजना भी पेश कर सकते हैं।
कोई नकद भुगतान नहीं मिलेगा, पहले खत्म करना होगा यूरेनियम: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की दोटूक
हालांकि, इन लीक खबरों पर अमेरिकी प्रशासन का रुख बेहद सख्त है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर चल रही इन खबरों को 'फेक न्यूज' बताते हुए स्पष्ट किया कि ईरान को केवल कागज पर दस्तखत करने के बदले कोई वित्तीय मदद या नकद भुगतान नहीं मिलने जा रहा है। वेंस ने साफ किया कि किसी भी तरह की आर्थिक राहत देने से पहले अमेरिका और उसके सहयोगियों के सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। समझौते की शर्तों के तहत ईरान को अपने पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को पूरी तरह नष्ट करना होगा, अपने गुप्त परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए बंद करना होगा और मध्य-पूर्व में सक्रिय आतंकी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर परमानेंट लॉक लगाना होगा। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट कर ईरान द्वारा आधी-अधूरी और गलत शर्तें लीक करने की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे समझौते के इच्छुक हैं, लेकिन देश की 'रेड लाइंस' (Red Lines) से कोई समझौता नहीं करेंगे।
शांति की आहट से झूम उठे वैश्विक बाजार: सेंसेक्स 1700 अंक उछला, कच्चा तेल 90 डॉलर के नीचे
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध टलने और शांति की इस खबर का दुनिया भर के वित्तीय बाजारों ने जोरदार स्वागत किया है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव कम होने की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखी गई। भारत का शेयर बाजार (BSE Sensex) करीब 1700 अंकों की ऐतिहासिक बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों को तगड़ा मुनाफा हुआ। इसके साथ ही भारतीय रुपये में मजबूती आई और सोने की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सबसे बड़ी राहत कच्चे तेल (Crude Oil) के मोर्चे पर मिली, जहां तेल की कीमतें दो महीने के सबसे निचले स्तर यानी 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं। दिग्गज ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म 'गोल्डमैन सैक्स' ने अनुमान जताया है कि अगर यह शांति समझौता जमीन पर उतरता है, तो साल 2027 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रह सकती हैं, जो भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए बेहद संजीवनी साबित होगा।