ट्रंप ने ऐन वक्त पर टाला कनाडा पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला! डील का दावा, जानें क्या सच में मान गए पीएम मार्क कार्नी
अमेरिका और कनाडा के बीच गहराते व्यापारिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर 50% दंडात्मक टैरिफ लगाने की समयसीमा से ठीक कुछ घंटे पहले इसे 3 दिनों के लिए टालने का फैसला किया। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई सामानों—जैसे शराब, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, डेयरी उत्पाद और खेल उपकरणों—पर यह भारी शुल्क लागू किया जाना था। यह शुल्क बुधवार रात 12:01 बजे से प्रभावी होने वाला था, लेकिन मंगलवार देर रात दोनों पक्षों के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद अस्थायी रोक लगा दी गई।
ट्रंप का बड़ी डील का दावा और कीस्टोन पाइपलाइन का जिक्र
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी साझा करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और कनाडा के बीच दस्तावेजों को अंतिम रूप देने की शर्त पर एक समझौता (Deal) हो गया है। ट्रंप ने अपने बयान में संकेत दिया कि वर्षों से रुकी हुई चर्चित कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन (Keystone XL Pipeline) परियोजना को भी दोबारा शुरू किया जा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय के अनुसार, इस समझौते में अमेरिकी उत्पादों को व्यापक बाजार पहुंच देना, आर्थिक सुरक्षा प्रतिबद्धताएं और डिजिटल व्यापार तालमेल शामिल हैं।
क्या पूरी तरह मान गए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी?
ट्रंप के एकतरफा डील के दावे के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। कार्नी ने यह नहीं कहा कि पूरा समझौता अंतिम रूप से संपन्न हो चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वार्ता टीमों के बीच "काफी प्रगति" (Substantial Progress) हुई है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण मसलों पर काम पूरा होना बाकी है। कार्नी ने पुष्टि की कि बातचीत को आगे बढ़ाने और दस्तावेज तैयार करने के लिए ही 3 दिनों का समय लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि कनाडा एक मजबूत, स्वतंत्र और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के निर्माण को प्राथमिकता देता रहेगा।
दोनों देशों के बीच आगे क्या होगा?
कनाडा के निर्यात का 70% से अधिक हिस्सा अमेरिका को जाता है, जिससे यह टैरिफ कनाडा के उद्योगों के लिए बड़ा नुकसानदेह हो सकता था। हालांकि, मार्क कार्नी घरेलू संप्रभुता और डेयरी-ऑटोमोबाइल सेक्टर के हितों को सुरक्षित रखने पर अड़े हुए हैं। 3 दिन की इस मोहलत के दौरान दोनों देशों के वार्ताकार अंतिम मसौदे पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि इस तय अवधि में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं होते हैं, तो टैरिफ का खतरा दोबारा मंडरा सकता है।