क्या अब व्हिस्की हो जाएगी सस्ती! ट्रंप ने लिया बड़ा यू-टर्न, 10% टैरिफ हटाने का किया ऐलान; आयरिश ओपन में दिया चौंकाने वाला बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक टैरिफ नीतियों में एक और बड़ा व चौंकाने वाला यू-टर्न लेते हुए मशहूर आयरिश व्हिस्की (Irish Whiskey) पर लगे 10% आयात शुल्क (Tariff) को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा कर दी है। आयरलैंड के डूनबेग (Doonbeg) में आयोजित 'आयरिश ओपन' गोल्फ टूर्नामेंट के समापन और ट्रॉफी वितरण समारोह के दौरान ट्रंप ने यह घोषणा की। अपने विशिष्ट और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले ट्रंप ने दर्शकों की भारी तालियों और सीटियों के बीच कहा कि आयरलैंड के प्रधानमंत्री से लेकर गोल्फ खिलाड़ियों तक, हर कोई इस टैरिफ को हटाने की लगातार गुहार लगा रहा था। ट्रंप के इस फैसले से जहां अमेरिकी उपभोक्ताओं और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए आगामी हॉलिडे सीजन में व्हिस्की की कीमतें कम होने का रास्ता साफ हुआ है, वहीं वैश्विक शराब बाजार में भी इसका सकारात्मक असर देखा जा रहा है।
'हर कोई मेरे पीछे पड़ा था': मंच से ट्रंप का मजेदार बयान
आयरिश ओपन के खिताबी मुकाबले के बाद मंच संभालते ही ट्रंप ने टैरिफ हटाने की घोषणा करते हुए माहौल को खुशनुमा बना दिया:
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प्रधानमंत्री और गोल्फर्स का आग्रह: ट्रंप ने खुलासा किया कि आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन (Micheál Martin) और आयरिश ओपन के विजेता शेन लोरी (Shane Lowry) समेत कई खिलाड़ियों ने उनसे व्हिस्की पर लगे टैरिफ को हटाने की व्यक्तिगत रूप से अपील की थी।
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ट्रंप की दो टूक टिप्पणी: मंच से ट्रंप ने कहा, "हर कोई मुझे इस काम के लिए तंग कर रहा था (Everybody's been bugging me)। इसलिए मैंने कहा—संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से, मैं आयरिश व्हिस्की पर लगे सभी टैरिफ हटा रहा हूं!"
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आयरिश व्हिस्की पर क्या था नियम: यूरोपीय संघ (EU) से आयात होने वाले उत्पादों पर ट्रंप प्रशासन ने पहले 15% का मानक टैरिफ लगाया था, जिसे जुलाई में घटाकर 10% किया गया था। अब इस 10% की बची हुई लेवी को भी शून्य करने का ऐलान कर दिया गया है।
ब्रिटेन को पहले ही मिल चुकी थी छूट, आयरलैंड में था असंतोष
दरअसल, ट्रंप के इस फैसले के पीछे ट्रांस-अटलांटिक व्यापार का एक बड़ा असंतुलन भी था:
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स्कॉच और यूके व्हिस्की को जीरो टैरिफ: ट्रंप ने अप्रैल के अंत में यूनाइटेड किंगडम (UK) से आने वाली स्कॉच और उत्तरी आयरलैंड की स्पिरिट्स पर शून्य-टैरिफ नीति की घोषणा की थी। ट्रंप ने दावा किया था कि ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान उनके अनुरोध पर यह छूट दी गई थी।
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व्यापारिक असंतुलन: ब्रिटेन की स्कॉच व्हिस्की ड्यूटी-फ्री हो जाने के बाद आयरलैंड गणराज्य की व्हिस्की पर 10% शुल्क बना हुआ था, जिससे अमेरिकी बाजार में आयरिश ब्रांड्स को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। आयरिश व्हिस्की एसोसिएशन (IWA) ने मई में ही अमेरिकी सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग उठाई थी।
क्या अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में सस्ती होगी व्हिस्की?
डिट्रंप के टैरिफ यू-टर्न से व्हिस्की प्रेमियों को राहत की उम्मीद, जानें कीमतों और ग्लोबल ट्रेड पर क्या होगा इसका असर
मेटा विवरण (Meta Description): Donald Trump Whiskey Tariff: डोनाल्ड ट्रंप ने व्हिस्की पर लगने वाले 10% आयात शुल्क (Tariff) को वापस लेने का संकेत दिया है। जानिए क्या भारत समेत वैश्विक बाजारों में स्कॉच और अमेरिकी बॉर्बन की कीमतें घटेंगी और ट्रेड वॉर पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और टैरिफ नीतियों को लेकर अक्सर सख्त रुख अपनाने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने वैश्विक शराब बाजार, खासकर प्रीमियम व्हिस्की इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने शराब और स्पिरिट्स पर लगाए गए 10 फीसदी आयात शुल्क (Import Duty/Tariff) के फैसले पर यू-टर्न लेते हुए इसे हटाने के संकेत दिए हैं। इस घोषणा के बाद से ही उपभोक्ता और आयातक यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या आने वाले दिनों में विदेशी व्हिस्की के दाम कम होंगे।
अमेरिकी स्पिरिट्स इंडस्ट्री, विशेष रूप से अमेरिकी बॉर्बन (Bourbon) और टेनेसी व्हिस्की (Tennessee Whiskey) के निर्माता लंबे समय से यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय जवाबी टैरिफ (Retaliatory Tariffs) के कारण भारी नुकसान झेल रहे थे। ट्रंप प्रशासन द्वारा पूर्व में स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में यूरोपियन यूनियन (EU) और यूके ने अमेरिकी व्हिस्की पर 25 से 50 फीसदी तक का पलटवार शुल्क लगाया था। बाद में इसे बातचीत के जरिए अस्थायी रूप से टाला गया, लेकिन व्यापारिक अनिश्चितता बनी हुई थी।
ग्लोबल स्पिरिट्स मार्केट और सप्लाई चेन पर ट्रंप के फैसले का असर
टैरिफ में 10% की कटौती या इसे पूरी तरह हटाने का सीधा असर अमेरिकी व्हिस्की के वैश्विक निर्यात पर सकारात्मक पड़ेगा। जब किसी उत्पाद पर सीमा शुल्क घटता है, तो डिस्टिलरीज की लॉजिस्टिक्स और लैंडिंग लागत कम हो जाती है। हालांकि, भारतीय बाजार के संदर्भ में स्थिति थोड़ी अलग और जटिल है।
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए विदेशी शराब पर केंद्र सरकार का बुनियादी सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) और कृषि अवसंरचना विकास उपकर (AIDC) पहले से ही 150% के अधिकतम स्तर पर है। इसके अलावा, भारत में शराब राज्य सूची (State List) का विषय है, जहां हर राज्य अपनी आबकारी नीति (Excise Policy), वैट (VAT) और अतिरिक्त उपकर तय करता है। यदि अमेरिकी सरकार अपने स्तर पर टैरिफ हटाती है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ अमेरिकी निर्यातकों और अंतरराष्ट्रीय थोक वितरकों को मिलेगा, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन में कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
यदि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के तहत प्रीमियम स्पिरिट्स पर शुल्क में कोई पारस्परिक छूट मिलती है, तभी खुदरा बाजार में बोतलों के एमआरपी (MRP) में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलेगी। फिलहाल यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय ट्रेड वॉर को शांत करने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव मानी जा रही है।