ट्रंप ने किया 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स' का गठन: 4 दिग्गजों की टीम संभालेगी कमान, दिसंबर तक आएगा नया कानून

ट्रंप ने किया 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स' का गठन: 4 दिग्गजों की टीम संभालेगी कमान, दिसंबर तक आएगा नया कानून

वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में अमेरिका का निर्विवाद वर्चस्व कायम रखने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक युगांतकारी कदम उठाया है। व्हाइट हाउस में तकनीकी दिग्गजों के साथ अहम बैठक और आधिकारिक कार्यकारी आदेश के बाद ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स' (Super Intelligence Force) के गठन की घोषणा कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने इस तकनीकी रूपांतरण को 18वीं सदी की औद्योगिक क्रांति और 90 के दशक की इंटरनेट क्रांति से भी कहीं अधिक व्यापक और शक्तिशाली बदलाव करार दिया है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत पूरे संघीय ढांचे में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) शब्द को आधिकारिक तौर पर 'सुपर इंटेलिजेंस' (SI) में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही पूरी व्यवस्था को कानूनी मान्यता और व्यापक अधिकार देने के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित करते हुए दिसंबर 2026 तक अमेरिकी कांग्रेस में नया कानून पेश करने का ऐलान किया गया है।

4 सदस्यीय हाई-पावर टीम: किन दिग्गजों के हाथों में होगी कमान?

सुपर इंटेलिजेंस फोर्स के संचालन, समन्वय और रणनीतिक दिशा तय करने के लिए ट्रंप ने एक 4 सदस्यीय विशेष संचालन टीम का गठन किया है, जो सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स को रिपोर्ट करेगी:

  1. जे क्लेटन (Jay Clayton): राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (Director of National Intelligence - DNI), जो इस टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर खतरों से निपटने की कमान संभालेंगे।

  2. एंड्रयू फर्ग्यूसन (Andrew Ferguson): फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) के चेयरमैन, जो तकनीक के वाणिज्यिक नियमन और बाजार प्रतिस्पर्धा की निगरानी करेंगे।

  3. एमिल माइकल (Emil Michael): रिसर्च एंड इंजीनियरिंग के लिए अंडर सेक्रेटरी ऑफ वॉर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO), जिनके जिम्मे रक्षा और मिलिट्री में सुपर इंटेलिजेंस का एकीकरण रहेगा।

  4. स्कॉट कुपोर (Scott Kupor): ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (OPM) के डायरेक्टर, जो संपूर्ण अमेरिकी संघीय तंत्र और सरकारी कर्मचारियों को इस आधुनिक तकनीक के अनुकूल ढालने का काम करेंगे।

इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट भी इस कोर टास्क फोर्स को रणनीतिक सहयोग प्रदान करेंगे।

दिसंबर तक नया कानून: 60 दिनों की सख्त कानूनी डेडलाइन

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह कदम केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप ने राष्ट्रपति के विज्ञान एवं तकनीक सलाहकार (APST) को 60 दिनों की सख्त समयसीमा सौंपी है। इस 60-दिवसीय समयसीमा के भीतर कानूनी संशोधनों, वैधानिक परिभाषाओं और नियामक ढांचे का पूरा मसौदा तैयार किया जाएगा, ताकि दिसंबर 2026 तक इसे अमेरिकी संसद (US Congress) के पटल पर रखकर पारित कराया जा सके। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य सुपर इंटेलिजेंस के विकास में आने वाली लालफीताशाही और अनावश्यक बाधाओं को पूरी तरह खत्म करना है, ताकि अमेरिकी टेक कंपनियां बिना किसी कानूनी अड़चन के इनोवेशन को चरम पर पहुंचा सकें।

चीन के साथ रेस और 'अमेरिका फर्स्ट': ट्रंप का आक्रामक संदेश

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को रेखांकित किया। ट्रंप ने कहा कि सुपर इंटेलिजेंस का यह दौर 'विजेता सब कुछ ले जाएगा' (Winner Takes All) के सिद्धांत पर चलेगा, जिसमें सिर्फ एक विजेता होगा और कोई दूसरा स्थान नहीं रहेगा। खासकर चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस रेस में किसी भी कीमत पर पीछे नहीं रह सकता। नई सुपर इंटेलिजेंस फोर्स का मुख्य कार्य अमेरिकी फेडरल एजेंसियों, सैन्य इकाइयों और खुफिया तंत्र के बीच तालमेल बैठाना होगा, जिससे विरोधी देशों के साइबर हमलों और तकनीकी घुसपैठ को पूरी तरह बेअसर किया जा सके।

सिलिकॉन वैली के टेक दिग्गजों का व्हाइट हाउस में महाजुटान

इस बड़े फैसले से पहले व्हाइट हाउस में दुनिया के सबसे प्रभावशाली टेक दिग्गजों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इसमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, एक्सएआई (xAI) के एलन मस्क, एनवीडिया के जेनसन हुआंग, ओपनएआई के ग्रेग ब्रॉकमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई शामिल रहे। इस दौरान एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनी, जिसमें अमेरिकी सुपर इंटेलिजेंस को दुनिया में सबसे शक्तिशाली बनाने के साथ-साथ सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने पर जोर दिया गया। ट्रंप प्रशासन ने इसी के साथ 'America.gov' नामक नया डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया है, जो सुपर इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके आम नागरिकों तक सरकारी सेवाओं को त्वरित गति से पहुंचाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की नई रूपरेखा

व्हाइट हाउस के अनुसार, सुपर इंटेलिजेंस फोर्स केवल एक सरकारी टास्क फोर्स नहीं होगी, बल्कि यह उद्योग जगत, रक्षा अनुसंधान केंद्रों, जनहित समूहों और नागरिक समाज के बीच एक सेतु की तरह कार्य करेगी। यह फोर्स एडवांस एआई सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों की गहन समीक्षा करेगी, संवेदनशील बुनियादी ढांचे की निगरानी रखेगी और यह तय करेगी कि अमेरिका का साइबर डिफेंस हमेशा दुनिया में सबसे अभेद्य बना रहे। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से वैश्विक टेक बाजार, रक्षा बजट और एआई स्टार्टअप्स की फंडिंग में एक नया बूम देखने को मिलेगा।