ट्रंप के 'एनर्जी सीजफायर' के चंद घंटों बाद यूक्रेन पर बरसे रूसी ड्रोन: खारकीव के गैस प्लांट और बिजली घर पर भीषण हमला, भड़के जेलेंस्की ने वाशिंगटन से लगाई गुहार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और यूक्रेन के बीच तथाकथित 'एनर्जी सीजफायर' (ऊर्जा संघर्ष विराम) के तत्काल प्रभाव से लागू होने के ऐतिहासिक ऐलान को चौबीस घंटे भी नहीं बीते थे कि जमीन पर युद्ध ने और अधिक उग्र रूप ले लिया। रूस की सेना ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव (Kharkiv) में स्थित रणनीतिक गैस उत्पादन संयंत्र और थर्मल पावर स्टेशन पर रॉकेट-संचालित ड्रोनों (Rocket-Powered Drones) और ग्लाइड बमों से ताबड़तोड़ हमले कर दिए। इस भीषण हवाई हमले में यूक्रेनी सरकारी ऊर्जा कंपनी 'नैफ्टोगाज' (Naftogaz) के गैस संयंत्र में भीषण आग लग गई और महत्वपूर्ण मशीनरी व उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। इसके साथ ही खारकीव के एक कंबाइंड हीट एंड पावर प्लांट को भी निशाना बनाया गया। इस घटनाक्रम ने व्हाइट हाउस के उस राजनयिक दावे की हवा निकाल दी है, जिसमें दोनों देशों के बीच ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने की कथित सहमति की बात कही गई थी।
नैफ्टोगाज गैस संयंत्र पर हमला: आग बुझाने और बहाली में जुटे तकनीकी दल
यूक्रेन की राष्ट्रीय तेल व गैस कंपनी नैफ्टोगाज के कार्यवाहक प्रमुख सेरही फेडोरेंको (Sergii Fedorenko) ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि रात के समय रूसी सेना ने खारकीव क्षेत्र में कंपनी के प्रमुख गैस निष्कर्षण और उत्पादन केंद्र पर सीधे ड्रोन दागे।
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अग्निकांड और नुकसान: तेज धमाके के बाद गैस स्टेशन के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में आग भड़क उठी, जिसे दमकल कर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद काबू में किया। गनीमत यह रही कि सायरन बजते ही संयंत्र के कर्मचारी भूमिगत बंकरों (Shelters) में चले गए थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन उपकरण जलने से उत्पादन व्यवस्था को गंभीर धक्का पहुंचा है।
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बिजली संयंत्र भी हुआ धुआं-धुआं: गैस फैसिलिटी के अलावा रूसी वायुसेना ने खारकीव के पावर ग्रिड और ताप बिजली घर को भी निशाना बनाया, जिससे शहर के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई और स्थानीय आबादी के बीच दहशत फैल गई।
जेलेंस्की का तीखा पलटवार: "हमारे लिए यह खबर नई थी, अब अमेरिका पुतिन को रोके"
हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अपने राष्ट्र के नाम वीडियो संबोधन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया।
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समझौते की जानकारी मीडिया से मिली: जेलेंस्की ने खुलासा किया कि उन्हें ट्रंप के इस 'एनर्जी सीजफायर' की जानकारी मीडिया के जरिए मिली थी और कीव के साथ इस पर पहले से कोई औपचारिक रूपरेखा साझा नहीं की गई थी।
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अमेरिका से ठोस गारंटी की मांग: जेलेंस्की ने कहा, "यूक्रेन शांति चाहता है और हमने अपनी सेना को उचित निर्देश दे रखे हैं। लेकिन रविवार रात रूस की किसी भी तेल रिफाइनरी में आग नहीं लगी, जबकि इसके ठीक उलट मॉस्को ने हमारे गैस प्लांट और पावर स्टेशनों पर बम बरसाए। अगर अमेरिकी प्रशासन वास्तव में आगे बढ़कर रूस को इस समझौते का सम्मान करने के लिए बाध्य करे, तभी यह संघर्ष विराम काम कर सकता है। पुतिन की जुबान पर भरोसा करने के बजाय अमेरिका को ठोस सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित करनी होगी।"
ट्रंप के रुख से क्यों नाराज है कीव: रूसी डीजल खरीद और नेतृत्व बदलने का बयान
यह ताजा सैन्य और कूटनीतिक संकट ऐसे समय गहराया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति और जेलेंस्की के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच चुकी है:
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रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने का दबाव: ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से जेलेंस्की को चेतावनी दी थी कि वे रूसी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले तुरंत बंद करें, क्योंकि इससे वैश्विक तेल बाजारों और अमेरिका में डीजल की कीमतों पर असर पड़ रहा है।
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रूसी डीजल आयात का सौदा: ट्रंप प्रशासन ने घरेलू ईंधन की कीमतें कम करने के नाम पर रूस से डीजल आयात के समझौते का संकेत दिया था, जिसे यूक्रेन ने अपने साथ 'साझेदारों का खुला विश्वासघात' करार दिया है।
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नेतृत्व बदलने की टिप्पणी: ट्रंप ने यह तक कह दिया था कि यूक्रेन को एक नया नेता चुनना चाहिए क्योंकि जेलेंस्की युद्ध समाप्त करने के अवसर गंवा रहे हैं। इसके जवाब में जेलेंस्की ने दो टूक कहा था कि यूक्रेन का नेतृत्व कौन करेगा, यह फैसला केवल देश की जनता कर सकती है, कोई बाहरी शक्ति नहीं।
सर्दियों से पहले यूक्रेन को अंधेरे में धकेलने की रूसी रणनीति
युद्ध विश्लेषकों का मानना है कि मॉस्को रणनीतिक रूप से सर्दियों की शुरुआत से ठीक पहले यूक्रेन के पूरे पावर ग्रिड, हीटिंग सिस्टम और घरेलू गैस नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। कड़ाके की ठंड में बिजली और हीटिंग बंद होने से यूक्रेनी नागरिकों का मनोबल तोड़ना रूस का मुख्य उद्देश्य है। दूसरी ओर, क्रेमलिन ने ट्रंप के सीजफायर ऐलान पर आधिकारिक तौर पर न तो सहमति जताई है और न ही खंडन किया है, बल्कि जमीन पर हमले जारी रखकर यह संदेश दिया है कि वह अमेरिका की शर्तों पर एकतरफा रियायत देने के मूड में नहीं है। खारकीव में गैस प्लांट पर हुए इस ताजे हमले ने साबित कर दिया है कि बिना ठोस अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सख्त प्रतिबंधों के, केवल सोशल मीडिया पर घोषित संघर्ष विराम युद्ध के मैदान में टिक नहीं सकते।