11 साल पुराने भूकंप से भी खौफनाक था मंजर: नेपाल की पहली महिला पायलट प्रिया अधिकारी ने 6 दिन में पूरे किए 100 से अधिक रेस्क्यू मिशन
प्रकृति की विभीषिका जब अपने चरम पर होती है, तब इंसान की बहादुरी और जज्बा ही उम्मीद की इकलौती किरण बनकर उभरता है। पड़ोसी देश नेपाल इन दिनों एक भीषण प्राकृतिक आपदा के दौर से गुजर रहा है, जहां लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते आई विनाशकारी बाढ़ और जानलेवा भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने तबाही का एक नया इतिहास लिख दिया है। देश के कई सुदूर और पहाड़ी इलाके पूरी तरह से दुनिया के बाकी हिस्सों से कट चुके हैं, और हर तरफ से सिर्फ तबाही और बर्बादी की डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। ऐसे बेहद संकटपूर्ण और जानलेवा माहौल में मानवीय सेवा और अदम्य साहस की एक ऐसी दास्तां सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मौत के मुहाने पर खड़े लोगों के लिए देवदूत का काम किया है। उन्होंने मात्र एक हफ्ते से भी कम यानी महज छह दिनों के भीतर रिकॉर्ड 100 से अधिक जोखिम भरे बचाव (रेस्क्यू) मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देकर अनगिनत बेसहारा लोगों की जिंदगियां बचाई हैं। उनके इस असाधारण और साहसिक कार्य ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हों, तो कोई भी प्राकृतिक आपदा और दुर्गम परिस्थिति इंसान के हौसले को नहीं डिगा सकती।
2015 के भूकंप से भी कहीं अधिक खतरनाक और चुनौतीपूर्ण था यह रेस्क्यू ऑपरेशन
यह पूरा राहत और बचाव अभियान कितना भयावह और चुनौतीपूर्ण था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद कैप्टन प्रिया अधिकारी ने अपने पूरे करियर का इसे सबसे कठिन अनुभव बताया है। सीएनएन (CNN) को दिए गए अपने साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस बार की आपदा से निपटना और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना साल 2015 में आए उस विनाशकारी नेपाल भूकंप से भी कहीं अधिक कठिन और जानलेवा साबित हुआ, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस बार की तबाही का एक बहुत बड़ा हिस्सा एक बेहद संकरी और गहरी घाटी के भीतर केंद्रित था, जहां हेलीकॉप्टर को उतारना और वहां तक पहुंच बनाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। हर सेकंड बदलता मौसम, तेज हवाएं, और आसमान में मंडराता मौत का खतरा, इन सब के बीच उड़ान भरना सामान्य पायलटों के बस की बात नहीं थी। लेकिन प्रिया अधिकारी ने अपनी अद्भुत विमानन कला और सूझबूझ का परिचय देते हुए इस असंभव प्रतीत होने वाले कार्य को संभव कर दिखाया। उन्होंने रसुवा जिले के बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित और दुर्गम तिमुरे इलाके सहित कई ऐसे संकरे और खतरनाक स्थानों पर अपने हेलीकॉप्टर को उतारा, जहां जाने से बड़े-बड़े अनुभवी पायलट भी कतरा रहे थे। उनके इस जांबाज अंदाज ने हर किसी को हैरान कर दिया है और उनकी पेशेवर दक्षता का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है।
कौन हैं कैप्टन प्रिया अधिकारी? केबिन क्रू से लेकर हिमालय की आसमान तक का सफर
41 वर्षीय कैप्टन प्रिया अधिकारी की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे उनका लंबा संघर्ष, कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने वाला जज्बा छिपा है। वह हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ एक बेहद अनुभवी हाई-एल्टीट्यूड हेलीकॉप्टर पायलट हैं, जिन्होंने पिछले कई सालों से दुर्गम पहाड़ों पर सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशंस को सफलतापूर्वक चलाया है। उनके अब तक के करियर में कई ऐसे मिशन शामिल रहे हैं जहां उन्हें बेहद अधिक ऊंचाई पर जाकर फंसे हुए या घायल पर्वतारोहियों की जान बचानी पड़ी है, और कई बार तो उन्हें लगभग 6,200 मीटर की ऊंचाई तक अपने विमान को लेकर जाना पड़ा है। हालांकि, उनका यह एविएशन का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई एनवायरनमेंटल साइंस यानी पर्यावरण विज्ञान में पूरी की थी और अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने एयरलाइंस में केबिन क्रू के तौर पर काम किया था। एक दिन हेलीकॉप्टर की एक साधारण सी जॉयराइड ने उनके भीतर आसमान में उड़ने और पायलट बनने की गहरी दिलचस्पी जगाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी कमर्शियल हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग पूरी करने के लिए फिलीपींस गईं। वहां अपने जरूरी फ्लाइंग घंटे पूरे करने के बाद वह साल 2017 में एक फुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बनीं और धीरे-धीरे अपनी कड़ी मेहनत के बल पर हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन में महारत हासिल कर ली। आज वह न केवल नेपाल की बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं।
मुश्किल इलाके और कीचड़ भरी जमीन: कैसे चलाए गए ये जोखिम भरे अभियान?
वर्तमान में चल रहे इस व्यापक बचाव अभियान का दायरा और आकार बहुत बड़ा रहा है, जिसमें तिमुरे और उसके आसपास के इलाकों से लोगों को निकालने के लिए लगभग 20 हेलीकॉप्टरों को एक साथ लगाया गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई बार एक ही बेहद छोटे और संकरे इलाके में एक साथ कई विमानों को ऑपरेशन चलाना पड़ता था। कैप्टन प्रिया अधिकारी ने मीडिया से साझा करते हुए बताया कि बचे हुए और फंसे हुए लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कई बार पांच से छह हेलीकॉप्टरों को लगभग एक ही समय पर एक साथ जमीन पर उतारना पड़ता था। ऐसे समय में हवा में किसी भी तरह के भीषण हादसे या विमानों के आपसी टकराव से बचने के लिए सभी पायलट लगातार रेडियो के जरिए आपस में एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे और पल-पल की गतिविधियों का तालमेल बिठाते थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सही दिशा में काम कर रहे हैं। इसके अलावा, वहां का भौगोलिक इलाका भी पायलटों के लिए एक बहुत बड़ा और अदृश्य खतरा पैदा कर रहा था। अचानक आई भीषण बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन (मडस्लाइड) की वजह से प्रभावित क्षेत्रों के कई हिस्सों में दलदली और अस्थिर कीचड़ की बहुत मोटी परतें जमा हो गई थीं। ऊपर आसमान से हवा में देखने पर वह जमीन बिल्कुल ठोस और सुरक्षित लगती थी, लेकिन पायलट कभी भी यह सटीक अंदाजा नहीं लगा पाते थे कि वह जमीन भारी-भरकम हेलीकॉप्टर के वजन को संभाल पाएगी या नहीं। इन तमाम अनिश्चितताओं और जानलेवा खतरों के बावजूद कैप्टन प्रिया अधिकारी और उनकी पूरी टीम ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया है, वह इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।