सीजफायर के कागजों पर गिरी बारूद की चिंगारी! हिजबुल्ला ने इजरायल पर दागे 200 रॉकेट, शांति की कोशिशें फिर नाकाम

सीजफायर के कागजों पर गिरी बारूद की चिंगारी! हिजबुल्ला ने इजरायल पर दागे 200 रॉकेट, शांति की कोशिशें फिर नाकाम

मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को एक बार फिर से तगड़ा झटका लगा है। इजरायल और हिजबुल्ला के बीच हुआ संघर्ष विराम (Ceasefire) अब सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है। सीमा पर अचानक से रॉकेट और ड्रोन्स की झड़ी लग गई है। इजरायली सेना की मानें तो सिर्फ बीते वीकेंड में ही हिजबुल्ला की तरफ से 200 से ज्यादा रॉकेट और प्रोजेक्टाइल दागे गए हैं। इस खौफनाक हमले ने शांति समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं और हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपनी कैबिनेट के साथ इमरजेंसी मीटिंग बुलानी पड़ गई है।

45 दिन का समझौता और 48 घंटे में टूटा भरोसा

आपको जानकर हैरानी होगी कि बीते शुक्रवार को ही इजरायल और लेबनान के बीच इस सीजफायर को 45 दिनों तक और बढ़ाने पर रजामंदी हुई थी। मकसद था कि जंग से जूझ रहे इलाकों में इंसानी मदद पहुंचाई जा सके और शांति की प्रक्रिया को पटरी पर लाया जाए। लेकिन यह समझौता 48 घंटे भी नहीं टिक सका। रविवार को आईडीएफ (IDF) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि हिजबुल्ला ने जानबूझकर इजरायली इलाकों और उनके जवानों को निशाना बनाते हुए लगभग 200 हमले किए हैं। इजरायली सेना ने इसे युद्धविराम का सीधा और खुला उल्लंघन करार दिया है।

नेतन्याहू की बढ़ी टेंशन, FPV ड्रोन बने नया 'काल'

रॉकेट हमलों के अलावा इजरायल के लिए एक नई और जानलेवा मुसीबत खड़ी हो गई है। रविवार को अपनी कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत करते हुए पीएम नेतन्याहू ने इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि हिजबुल्ला अब इजरायली सेना के खिलाफ फाइबर-ऑप्टिक फर्स्ट-पर्सन-व्यू (FPV) ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। ये ड्रोन्स कम लागत में बनते हैं लेकिन बेहद सटीक और घातक वार करते हैं। नेतन्याहू ने अपनी रक्षा टीम और विशेषज्ञों को कड़े निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द इन ड्रोन्स को हवा में ही नाकाम करने का तोड़ निकाला जाए, क्योंकि यह एक बिल्कुल अलग तरह का खतरा बनकर उभर रहा है।

आखिर क्यों भड़की थी ये आग और क्या हैं मौत के डराने वाले आंकड़े?

इस पूरे खूनी खेल की शुरुआत 2 मार्च को हुई थी, जब हिजबुल्ला ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान का बदला लेने के लिए इजरायल पर रॉकेट बरसाए थे। जवाब में इजरायल ने भी अपनी पूरी ताकत के साथ दक्षिण लेबनान पर धावा बोल दिया। तब से लेकर आज तक दोनों तरफ से तबाही का सिलसिला थमा नहीं है। लेबनान के अधिकारियों की तरफ से जारी आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। अब तक 2900 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सबसे डराने वाली बात तो यह है कि 17 अप्रैल को जब से यह शांति समझौता लागू हुआ था, उसके बाद से ही 400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वहीं, इजरायल का कहना है कि दक्षिण लेबनान में जमीनी ऑपरेशन शुरू होने के बाद से उन्होंने अपने 20 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार को खोया है। इन ताजा हमलों और नेतन्याहू के आक्रामक रुख ने एक बात तो साफ कर दी है कि मिडिल ईस्ट में फिलहाल शांति बहुत दूर की कौड़ी नजर आ रही है।

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