यूएन मंच पर भारत से तनाव के बीच शहबाज शरीफ ने की ट्रंप की तारीफ
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से दुनिया ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक अनोखा रंग देखा, जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ हुए सैन्य तनाव और संघर्ष का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ की। शहबाज शरीफ द्वारा अमेरिकी नेतृत्व और उनके हस्तक्षेप का गुणगान करने वाला यह वीडियो सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी गदगद नजर आए और उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति और वैश्विक मंचों पर अमेरिका की भूमिका को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है, क्योंकि भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक सत्र के दौरान अपने संबोधन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ अपनी बयानबाजी जारी रखते हुए पिछले सैन्य टकराव और ऑपरेशनों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच के हालात एक समय पर परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच गए थे और ऐसे नाजुक समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक सूझबूझ और त्वरित हस्तक्षेप ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जिंदगियों को बचा लिया। शहबाज शरीफ ने ट्रंप को शांति का मसीहा बताते हुए यह तक कह डाला कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव और कूटनीतिक प्रयासों के कारण ही दोनों देशों के बीच बड़ा विनाश टल सका। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इन बयानों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी प्रमुखता से कवर किया गया और उनके भाषण की क्लिप तेजी से वायरल होने लगी।
ट्रंप का बड़ा दावा और शहबाज शरीफ के बयान पर अमेरिकी प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा की गई इस तारीफ पर अपनी प्रसन्नता छिपाई नहीं। ट्रंप ने अपने बयानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए इस बात को दोहराया कि उन्होंने अपने व्यापारिक रसूख, टैरिफ की धमकियों और कूटनीतिक दबाव का इस्तेमाल करते हुए भारत और पाकिस्तान जैसे दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच आसन्न युद्ध को टाल दिया था। ट्रंप ने अपने संबोधन में शहबाज शरीफ को एक अच्छा इंसान बताया और कहा कि उन्हें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की तरफ से एक धन्यवाद पत्र भी मिला है जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि अमेरिकी हस्तक्षेप ने क्षेत्र में भारी जनहानि को रोका है। अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस तरह खुलेआम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के इस नैरेटिव को प्रमोट करने से वैश्विक राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
भारतीय कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के इन दावों और ड्रामेबाजी का भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पूरी मजबूती और बेबाकी से जवाब दिया। जब पाकिस्तानी पीएम मंच से अपनी तथाकथित सैन्य विजय के दावे कर रहे थे, तब भारतीय राजनयिकों ने उनकी इन बातों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसेरी खारिज किया। भारत का रुख हमेशा से बेहद स्पष्ट रहा है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय मुद्दों पर नई दिल्ली किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता या हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करती है। भारत ने दुनिया को यह बता दिया है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत बयानों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नाटकीय宣伝 का सहारा ले रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि क्षेत्रीय शांति में बाधा डालने का काम हमेशा से इस्लामाबाद की ओर से होता आया है।