सर्जियो गोर के 7 शब्दों ने हिलाया पाकिस्तान: भारत के साथ खड़े अमेरिका ने कश्मीर पर दिया ऐसा बयान कि इस्लामाबाद में मच गई खलबली
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इस समय भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है, जिसने सीधे तौर पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. हाल ही में भारत के दौरे पर आए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एक ऐसा बयान दे डाला है, जिसके बाद से इस्लामाबाद से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. सर्जियो गोर ने अपने श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को "भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा" करार दिया, और उनके मुंह से निकले इन सात शब्दों ने पाकिस्तान की पुरानी और भारत-विरोधी बयानबाजी की पूरी हवा निकाल दी है. जैसे ही अमेरिकी राजनयिक का यह बयान सामने आया, वैसे ही पाकिस्तान के हुक्मरानों और विदेश मंत्रालय में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में अमेरिकी राजदूत को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया गया. भू-राजनीतिक एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि दशकों के इतिहास में यह पहला मौका है जब अमेरिका के किसी शीर्ष अधिकारी ने क्षेत्रीय कूटनीति के बीच इतने स्पष्ट और बेबाक शब्दों में भारत की संप्रभुता का समर्थन किया है, जिससे पाकिस्तान समर्थित लॉबी पूरी तरह से सदमे में आ गई है.
सर्जियो गोर के इस दौरे और बयान से क्यों बौखलाया हुआ है पाकिस्तान
पाकिस्तान की हमेशा से यह कोशिश रही है कि कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता बनी रहे या फिर पश्चिमी देश इस पर कोई संदिग्ध रुख अपनाए रखें, ताकि वह वैश्विक मंचों पर भारत के खिलाफ झूठा پروपेगैंडा फैला सके. लेकिन अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ अपनी बैठक के दौरान और सार्वजनिक मंच से जम्मू-कश्मीर की तारीफ करते हुए इसे भारत का अहम हिस्सा बताया, तो पाकिस्तान के पैरों तले जमीन खिसक गई. इस बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स (प्रभारी राजनयिक) को तलब किया और एक औपचारिक डिमार्चे सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की. पाकिस्तानी मीडिया और वहां के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर मातम पसरा है कि जिस अमेरिका को वे अपना पारंपरिक मददगार मानते आए हैं, उसी महाशक्ति के एक शीर्ष दूत ने भारत के आंतरिक मामलों पर मुहर लगाकर उनकी कूटनीतिक चालों को धराशायी कर दिया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक मंच पर भारत का कद कितना मजबूत हो चुका है और अब दुनिया की महाशक्तियां भी पाकिस्तान के दबाव में आने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं.
अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स की नजर में क्या बदलते वैश्विक समीकरणों के मायने
दुनियाभर के कूटनीतिक मामलों के जानकारों और वरिष्ठ राजनयिकों का यह मानना है कि सर्जियो गोर का यह बयान केवल एक साधारण टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में अमेरिका की बदलती हुई दीर्घकालिक नीति का एक बड़ा हिस्सा है. पूर्व राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका अब यह अच्छी तरह समझ चुका है कि भारत ही इस क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से उसका सबसे भरोसेमंद और मजबूत रणनीतिक साझीदार है. जब अमेरिकी दूत ने श्रीनगर की वादियों में पहुंचकर वहां के सुरक्षा सुधारों, विकास कार्यों और स्थानीय नेतृत्व की सराहना की, तो उन्होंने अलगाववादियों और पाकिस्तान के उस इकोसिस्टम को भी करारा जवाब दिया जो लंबे समय से कश्मीर की शांति को बाधित करने की फिराक में रहता था. इस दौरे के दौरान अमेरिकी दूत ने किसी भी अलगाववादी या भारत-विरोधी तत्वों से मिलने से पूरी तरह परहेज किया, जो अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है. यह इस बात को साबित करता है कि वाशिंगटन अब कश्मीर को लेकर पुरानी और निष्प्रभावी हो चुकी नीतियों से पूरी तरह बाहर निकल चुका है और भारत के साथ अपने रक्षा, व्यापारिक व रणनीतिक रिश्तों को सबसे ऊपर रख रहा है.
भारत की मजबूत कूटनीति और वाशिंगटन के बदलते रुख का भविष्य पर असर
पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति ने वैश्विक स्तर पर जो नए आयाम स्थापित किए हैं, उसने दुनिया के बड़े-बड़े देशों को भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल अपने रुख को बदलने पर मजबूर कर दिया है. कश्मीर के मुद्दे पर भारत का यह स्पष्ट स्टैंड हमेशा से रहा है कि यह देश का पूरी तरह से आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं किया जाएगा. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के ताजा बयानों और दौरों ने इस भारतीय दावे पर एक प्रकार से अंतरराष्ट्रीय मुहर लगाने का काम किया है, जिससे भारत के घरेलू और विदेशी दोनों मोर्चों पर कूटनीतिक बढ़त हासिल हुई है. हालांकि भारत के भीतर कुछ विपक्षी दलों ने इस पर अपनी अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं, लेकिन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो यह घटना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका है जो अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पूरी तरह अलग-थलग पड़ता जा रहा है. आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदों, तकनीकी साझेदारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर आपसी सहयोग और अधिक प्रगाढ़ होने की पूरी उम्मीद है, और इस प्रकार के बयानों से यह साफ हो जाता है कि आतंकवाद और संप्रभुता के मुद्दों पर वैश्विक महाशक्तियां अब पूरी दृढ़ता के साथ भारत के साथ कंधे से कंधا मिलाकर खड़ी हैं.