अमेरिकी मिलिट्री बेस के पास चीन की 'सीक्रेChina's 'secret factory' near US military base: Xi Jinping's move sparks alarm at the Pentagon.
वाशिंगटन और बीजिंग के बीच चल रहे कोल्ड वॉर के बीच एक ऐसी खुफिया रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के होश उड़ा दिए हैं। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद संवेदनशील अमेरिकी सैन्य अड्डे (US Military Base) के बिल्कुल नजदीक एक संदिग्ध 'सीक्रेट फैक्ट्री' का पता लगाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी परियोजना के तार सीधे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बीजिंग सरकार से जुड़े होने के दावे किए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा अलार्म बज गया है।
सैन्य ठिकाने की जासूसी या नई चाल? व्हाइट हाउस हुआ अलर्ट
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (FBI और NSA) की राडार पर आई यह जमीन एक चीनी कंपनी द्वारा खरीदी गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह तथाकथित फैक्ट्री जिस इलाके में बनाई जा रही है, वहां से अमेरिकी सेना के गुप्त कम्यूकेशन नेटवर्क और रणनीतिक ठिकानों पर सीधे नजर रखी जा सकती है। व्हाइट हाउस और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस बात को लेकर बेहद गंभीर हैं कि शी जिनपिंग की सरकार इस फैक्ट्री की आड़ में अमेरिकी मिलिट्री की गतिविधियों, सिग्नल्स और गोपनीय डेटा की जासूसी (Espionage) करने का एक परमानेंट ठिकाना तैयार कर रही है।
कमर्शियल प्रोजेक्ट की आड़ में 'डार्क नेटवर्क': क्यों घबराया अमेरिका?
यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने अमेरिका की धरती पर इस तरह का 'लैंड एक्विजिशन' (जमीन अधिग्रहण) किया हो। इससे पहले भी नॉर्थ डकोटा और टेक्सास जैसे राज्यों में अमेरिकी एयरफोर्स बेस के पास चीनी कंपनियों द्वारा कृषि या रिन्यूएबल एनर्जी के नाम पर जमीनें खरीदने के मामले सामने आ चुके हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग की यह रणनीति बेहद साइलेंट और खतरनाक है। एक तरफ चीन दुनिया के सामने इसे सामान्य व्यापारिक निवेश बताता है, वहीं दूसरी तरफ इन गुप्त ठिकानों का इस्तेमाल 'सिग्नल इंटेलिजेंस' और साइबर अटैक के लॉन्चपैड के रूप में किए जाने का पूरा अंदेशा रहता है।
अमेरिकी संसद में बवाल: ड्रैगन पर अब बड़े एक्शन की तैयारी
इस सीक्रेट फैक्ट्री के इनपुट बाहर आते ही अमेरिकी संसद (Congress) में दोनों ही पार्टियों (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन) के सांसदों ने जो बाइडन प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। मांग उठ रही है कि इस संदिग्ध चीनी प्रोजेक्ट को तुरंत सील किया जाए और मिलिट्री बेस के आसपास विदेशी निवेश के नियमों को और ज्यादा कड़ा किया जाए। इस घटना ने पहले से ही तल्ख चल रहे अमेरिका-चीन संबंधों में बारूद का काम किया है। अब देखना यह है कि पेंटागन इस चीनी चुनौती से निपटने के लिए क्या कड़ा कदम उठाता है और शी जिनपिंग के इस 'साइलेंट वॉर' का क्या जवाब देता है।