पाकिस्तान के लक्की मरवत में रिक्शा बम ब्लास्ट से दहल उठा बाजार, 9 की मौत, टीटीपी पर शक

पाकिस्तान के लक्की मरवत में रिक्शा बम ब्लास्ट से दहल उठा बाजार, 9 की मौत, टीटीपी पर शक

Up kiran, Digital Desk : पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में मंगलवार को एक और भीषण आतंकी हमला हुआ। अफगानिस्तान सीमा से सटे लक्की मरवत जिले के एक खचाखच भरे बाजार में हुए आत्मघाती विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक हमले में दो पुलिस अधिकारियों सहित 9 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

बाजार के बीचों-बीच फटा 'मौत का रिक्शा'

स्थानीय पुलिस प्रमुख अजमत उल्लाह के अनुसार, हमलावरों ने एक रिक्शे का इस्तेमाल आत्मघाती हमले के लिए किया था। यह रिक्शा विस्फोटकों से पूरी तरह लदा हुआ था। जब बाजार में लोगों की काफी भीड़ थी, तभी हमलावर ने रिक्शे में धमाका कर दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं और चीख-पुकार मच गई। इस हमले में मरने वालों में दो ट्रैफिक पुलिस कर्मी और एक महिला भी शामिल हैं।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर गहराया शक

हालांकि अभी तक किसी भी संगठन ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का सीधा शक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर है।

  • वैचारिक संबंध: टीटीपी को 'पाकिस्तानी तालिबान' के रूप में जाना जाता है, जिसके अफगान तालिबान के साथ गहरे वैचारिक संबंध हैं।

  • बढ़ते हमले: पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से, टीटीपी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सार्वजनिक स्थानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

बन्नू हमले के बाद फिर दहला इलाका

यह विस्फोट उस घटना के ठीक बाद हुआ है जब कुछ ही दिन पहले बन्नू जिले में एक सुरक्षा चौकी को निशाना बनाया गया था। शनिवार रात बन्नू में हुए आत्मघाती हमले और गोलीबारी में 15 पुलिस कर्मियों की शहादत हुई थी। लक्की मरवत की ताज़ा घटना यह दर्शाती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।

पाक-अफगान रिश्तों में कड़वाहट और कूटनीतिक जंग

इन लगातार हो रहे हमलों ने इस्लामाबाद और काबुल के बीच कूटनीतिक दरार को और चौड़ा कर दिया है।

  • पाकिस्तान का आरोप: पाकिस्तान सरकार का दावा है कि अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रहा है। इसी सिलसिले में पाकिस्तान ने हाल ही में अफगान राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

  • अफगानिस्तान का बचाव: काबुल ने इन आरोपों को हमेशा की तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने देते।

चीन की शांति कोशिशें भी पड़ रही हैं फीकी?

सीमा पर बढ़ते तनाव और सैकड़ों मौतों को देखते हुए इसी साल अप्रैल में चीन ने मध्यस्थता की पहल की थी। चीन ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता आयोजित कराई थी ताकि व्यापार और सुरक्षा पर सहमति बन सके। हालांकि इस वार्ता के बाद बड़े सैन्य संघर्षों में कमी आई है, लेकिन लक्की मरवत जैसा आत्मघाती हमला यह बताने के लिए काफी है कि शांति अभी कोसों दूर है।

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