पुतिन-जिनपिंग की महा-जुगलबंदी: क्या सच में होने वाली है परमाणु जंग

पुतिन-जिनपिंग की महा-जुगलबंदी: क्या सच में होने वाली है परमाणु जंग

आज की सबसे बड़ी वैश्विक हलचल महाशक्तियों के गलियारों से आ रही है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बढ़ती नजदीकियों ने एक बार फिर पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और नाटो (NATO) सहयोगियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हाल ही में सामने आई एक लीक खुफिया रिपोर्ट ने दावा किया है कि दोनों देश बेहद गोपनीय तरीके से बड़े स्तर पर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, जो आम नहीं बल्कि परमाणु और केमिकल वॉर (परमाणु और रासायनिक युद्ध) से जुड़ा है।

चीन के सुदूर इलाकों में चल रही है सीक्रेट ट्रेनिंग

लीक हुई खुफिया जानकारियों के मुताबिक, चीन के बेहद सुरक्षित और संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर यह सीक्रेट ट्रेनिंग चल रही है। इस अभ्यास में रूस के परमाणु विशेषज्ञ और चीनी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष कमांडर हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य परमाणु हमले की स्थिति में दोनों देशों के बीच तुरंत तालमेल बिठाना और जवाबी कार्रवाई को अंजाम देना है। इसके अलावा, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और उनसे बचाव की तकनीकों का भी कड़ा अभ्यास किया जा रहा है।

लीक रिपोर्ट से आखिर क्यों कांप उठे पश्चिमी देश

इस सीक्रेट मिशन की खबर बाहर आते ही वाशिंगटन से लेकर लंदन तक हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक रूस और चीन केवल आर्थिक या सामान्य सैन्य स्तर पर एक-दूसरे का साथ दे रहे थे, लेकिन परमाणु स्तर पर इस तरह का खुफिया गठबंधन पूरी दुनिया के पावर बैलेंस (शक्ति संतुलन) को बदल सकता है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि इस ट्रेनिंग का दायरा कितना बड़ा है और क्या इसमें नए जमाने के हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम को भी शामिल किया गया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा असर

यह हलचल ऐसे समय में हो रही है जब ताइवान संकट और यूक्रेन युद्ध को लेकर पहले से ही वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर है। स्थानीय और भौगोलिक दृष्टि से देखें तो इस सीक्रेट ट्रेनिंग का सबसे पहला और सीधा असर एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र पर पड़ेगा। भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे पड़ोसी देश भी इस नई सैन्य धुरी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। भू-राजनीतिक (Geopolitical) जानकारों का मानना है कि यदि रूस और चीन का यह परमाणु समीकरण मजबूत होता है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक सुरक्षा के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।

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