सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का 'रोता' हुआ नया नाटक: भारत के खौफ से नाम लेने की भी नहीं हुई हिम्मत

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का 'रोता' हुआ नया नाटक: भारत के खौफ से नाम लेने की भी नहीं हुई हिम्मत

पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के निलंबन के बाद से पूरी तरह बेदम हो चुका है। वैश्विक मंचों पर बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब उसकी एक न चली, तो अब पाकिस्तान ने इसे लेकर एक 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस' का ड्रामा शुरू किया है। इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी नेताओं का रोना-धोना तो जारी रहा, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पाकिस्तान का खौफ इतना गहरा है कि उसके नेता मंच से 'भारत' का नाम तक लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। भारत की सैन्य ताकत और कड़े फैसलों के डर से पाकिस्तानी नेताओं ने सीधे तौर पर नाम लेने के बजाय 'ताकतवर देश' कहकर अपनी बौखलाहट जाहिर की।

भारत के डर से 'ताकतवर देश' का जपा नाम

पाकिस्तानी सांसद मुसादिक मलिक ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि "कोई ताकतवर देश अपनी मर्जी से किसी समझौते को रद्द नहीं कर सकता।" गौरतलब है कि भारत ने बीते साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के बाद यह समझौता स्थगित कर दिया था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया था। उस बर्बर हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों की कमर तोड़ दी थी। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।'

उपप्रधानमंत्री इशाक डार और बिलावल भुट्टो का बेतुका राग

कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने बेतुकी बातें करते हुए कहा कि वे भारत के फैसले को खारिज करते हैं और समझौता अभी भी वैध है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु नदी की तुलना 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' और 'स्वेज नहर' जैसे वैश्विक जलमार्गों से कर दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। बिलावल ने इसे 'हथियार के रूप में इस्तेमाल' होने से बचाने का राग अलापा, लेकिन वे यह भूल गए कि यह कदम पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का ही सीधा परिणाम है।

क्यों दाने-दाने को मोहताज हो रहा पाकिस्तान?

पाकिस्तान की बौखलाहट के पीछे की असली वजह उसकी अर्थव्यवस्था और कृषि का पूरी तरह सिंधु नदी पर निर्भर होना है। भारत द्वारा हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा न करने के कारण पाकिस्तान अब पूरी तरह अंधेरे में है। उसे यह नहीं पता चल पाता कि भारतीय नदियों से कितना पानी आ रहा है, जिससे वह बाढ़ या सूखे की स्थिति में समय रहते बचाव नहीं कर पा रहा है। अपनी खुद की गलतियों और आतंक को पालने के कारण आज पाकिस्तान न केवल आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, बल्कि भारत के इस कड़े कदम से वह दाने-दाने के लिए भी मोहताज होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।

Latest Posts