पाक में हाहाकार! सरकार को ठेंगा दिखा व्यापारियों ने ₹170 किलो पहुंचाया आटे का भाव, कराची में सप्लाई ठप होने का संकट

पाक में हाहाकार! सरकार को ठेंगा दिखा व्यापारियों ने ₹170 किलो पहुंचाया आटे का भाव, कराची में सप्लाई ठप होने का संकट

गंभीर आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में बुनियादी खाद्य पदार्थों की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सिंध प्रांत की राजधानी और पाकिस्तान की आर्थिक धड़कन कहे जाने वाले कराची शहर में इन दिनों आटे की कीमतों को नियंत्रित करने को लेकर प्रांतीय सरकार और आटा मिल उद्योग के बीच एक बड़ा और हिंसक प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सख्त चेतावनियों और नए आधिकारिक नोटिफिकेशन के बावजूद, बाजार के बड़े व्यापारियों और मिल मालिकों ने सरकारी आदेशों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। इस टकराव के कारण आने वाले दिनों में पूरे कराची महानगर में आटे की सप्लाई चेन पूरी तरह से ठप होने और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होने की गंभीर आशंका बढ़ गई है।

कागजों पर सिमटीं सरकारी दरें: नोटिफिकेशन के बाद भी ऊंचे दामों पर बिक रहा है अनाज

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' द्वारा जारी एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, कराची के स्थानीय प्रशासन ने बेलगाम हो रही महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आनन-फानन में एक नया प्राइस-कंट्रोल नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नए सरकारी आदेश के तहत सामान्य श्रेणी के आटे की खुदरा कीमत 125 पाकिस्तानी रुपये (PKR) प्रति किलोग्राम, महीन (फाइन) आटे की कीमत 135 PKR प्रति किलोग्राम और शुद्ध चक्की के आटे की दर 145 PKR प्रति किलोग्राम तय की गई थी। इसके साथ ही थोक बाजार के लिए भी कीमतें क्रमशः 122 और 132 रुपये निर्धारित की गई थीं। परंतु, धरातल पर सरकार का यह आदेश पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है। शहर के खुदरा बाजारों में आज भी सामान्य आटा 145 से 150 रुपये और बारीक तथा महीन आटा 160 से 170 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुलेआम बेचा जा रहा है।

मिल मालिकों की खुली बगावत: गेहूं की बढ़ती इनपुट लागत का हवाला देकर फैसले को मानने से इनकार

सरकारी नियंत्रण के खिलाफ पाकिस्तान के आटा मिल संघ (Flour Mills Association) और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उद्योगपतियों का साफ तर्क है कि सरकार द्वारा एकतरफा तरीके से तय की गई ये कागजी दरें व्यावहारिक नहीं हैं और वे इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि ओपन मार्केट में गेहूं की इनपुट लागत (Wheat Procurement Cost) और बिजली-ईंधन के दामों में जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, सरकार ने इस नए नोटिफिकेशन में उसकी पूरी तरह अनदेखी की है। घाटे में धंधा करने से साफ मना करते हुए मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर जबरन सरकारी रेट थोपने की कोशिश की गई या प्रशासनिक कार्रवाई की गई, तो वे अपनी मिलों में ताला लगा देंगे, जिससे पूरे देश में गेहूं का अकाल पड़ सकता है।

सप्लाई चेन टूटने की कगार पर: आम जनता के बीच जमाखोरी और भुखमरी का बढ़ा खौफ

इस बड़े प्रशासनिक और व्यापारिक गतिरोध का सीधा खामियाजा कराची की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता को भुगतना पड़ रहा है। बाजार में भारी अनिश्चितता के चलते खुदरा दुकानदारों ने आटे की जमाखोरी शुरू कर दी है, जिससे कई इलाकों में राशन की किल्लत पैदा हो गई है। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और मिल मालिकों के बीच जल्द ही कोई व्यावहारिक समझौता नहीं हुआ, तो आने वाले 48 घंटों में कराची की आटा मंडियां पूरी तरह से बंद हो सकती हैं। यह संकट ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कठिन शर्तों और भारी विदेशी कर्ज के नीचे दबा हुआ है, जिससे शहबाज शरीफ सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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