अमेरिका की ईरान पर सबसे बड़ी ‘आर्थिक स्ट्राइक’: क्या है ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ और किन 6 प्रमुख क्षेत्रों पर होगा सीधा प्रहार? जानिए पूरा प्लान
पश्चिम एशिया में जारी लंबे तनाव और भू-राजनीतिक टकराव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और आक्रामक आर्थिक घेराबंदी शुरू कर दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) का आधिकारिक ऐलान करते हुए इसे आर्थिक मोर्चे का 'डी-डे' (Economic D-Day) करार दिया है।
इस नई नीति का सीधा उद्देश्य ईरान के वैश्विक व्यापारिक संपर्कों को पूरी तरह काटकर उसकी अर्थव्यवस्था को अलग-थलग (Isolate) करना और उसकी वित्तीय जीवन रेखा को समाप्त करना है। अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी देश, बैंक या कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी, उन पर सख्त सेकेंडरी सैंक्शन्स (Secondary Sanctions) लगाए जाएंगे और उन्हें अमेरिकी डॉलर क्लियरिंग सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
क्या है 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और अमेरिका का 'जीरो-लीकेज' रुख?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह केवल नियमित प्रतिबंधों की घोषणा नहीं है, बल्कि एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नाकेबंदी है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी प्रशासन ने उन सभी माध्यमों और नेटवर्कों का नक्शा तैयार किया है जिनका इस्तेमाल ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और गुप्त तरीके से धन जुटाने के लिए करता रहा है।
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ग्लोबल नेटवर्क्स पर एक्शन: अमेरिका के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने अवैध मिसाइल व न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी खरीद, साइबर हमलों और तेल तस्करी से जुड़ी करीब 60 वैश्विक संस्थाओं, जहाजों और व्यक्तियों को एक साथ प्रतिबंधित किया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त चेतावनी: अमेरिका ने वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के लिए ईरान को किसी भी प्रकार का टैक्स या टोल (Toll) देना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन माना जाएगा।
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तीसरे देशों को अल्टीमेटम: अमेरिकी अधिकारियों की टीमें दुनिया भर के सहयोगी व साझीदार देशों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें ईरान के साथ अपने सभी वित्तीय सौदे बंद करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा (Timeline) दे रही हैं।
इन 6 अहम क्षेत्रों पर होगा अमेरिका का सीधा और निर्णायक वार
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले 6 प्रमुख स्तंभों को चिन्हित कर उन पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है:
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कच्चा तेल और शैडो फ्लीट (Crude Oil & Shadow Fleet): ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह शून्य करने के लिए उसके 'शैडो फ्लीट' (अवैध तेल ले जाने वाले गुप्त टैंकरों के नेटवर्क) पर शिकंजा कसा गया है। चीनी रिफाइनरियों और बिचौलियों को तेल पहुंचाने वाले जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है।
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डिजिटल एसेट्स और क्रिप्टोकरेंसी (Digital Assets & Crypto): अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान द्वारा इस्तेमाल की जा रही वर्चुअल करेंसी और डिजिटल एसेट्स प्लेटफॉर्म्स को ट्रैक कर उन्हें ब्लॉक किया जा रहा है।
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सोना और कीमती धातुएं (Gold & Precious Metals): स्थानीय मुद्रा (रियाल) की भारी गिरावट को थामने और विदेशी संपत्तियों के बदले गोल्ड ट्रांसफर के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
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एविएशन सेक्टर (Aviation): नागरिक और सैन्य विमानन कंपनियों, विमानों के पुर्जों की आपूर्ति और हवाई मार्गों के जरिए हथियारों या नकदी की ढुलाई से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।
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शिपिंग और समुद्री परिवहन (Shipping): ईरान के सरकारी और निजी समुद्री शिपिंग नेटवर्क, कंटेनर लॉजिस्टिक्स और बंदरगाहों से संचालित होने वाले कार्गो मूवमेंट पर कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
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एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और साइबर नेटवर्क (Technology & Cyber): मिसाइल और ड्रोन तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक पुर्जों की खरीद और महत्वपूर्ण अमेरिकी व वैश्विक बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले करने वाले ऑपरेटरों पर कानूनी कार्रवाई की गई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर क्या होगा असर?
अमेरिकी वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर के बैंकों को ईरान से अलग होने के लिए एक संक्षिप्त मोहलत (Cure Period) दी जा रही है, लेकिन यदि किसी बड़े वित्तीय संस्थान ने नियमों का उल्लंघन जारी रखा, तो उस पर इसी सप्ताह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरी ओर, इस आक्रामक आर्थिक वार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह इस 'आर्थिक युद्ध' का जवाब देने के लिए तैयार है, जिससे आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया का तनाव और अधिक गहराने के आसार हैं।