उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल

पूर्वी एशिया के कोरियाई प्रायद्वीप (Korean Peninsula) से एक बार फिर बेहद डरावनी और तनावपूर्ण खबरें सामने आ रही हैं, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों और वैश्विक शांति के पैरोकारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। तानाशाह किम जोंग उन के शासन वाले देश उत्तर कोरिया (North Korea) ने एक बार फिर अपनी पुरानी और आक्रामक फितरत दिखाते हुए दक्षिण कोरिया की समुद्री सीमा और उसकी मुख्य भूमि की दिशा में एक शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) दाग दी है। इस अचानक किए गए दुस्साहसिक और भड़काऊ मिसाइल परीक्षण के बाद से ही सियोल (Seoul) से लेकर टोक्यो तक हड़कंप मच गया है। उत्तर कोरिया के इस आक्रामक कदम को दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से ही सुलग रहे राजनीतिक और सैन्य तनाव को और अधिक भड़काने वाला कृत्य माना जा रहा है। जैसे ही प्योंगयांग द्वारा इस मिसाइल को लॉन्च किया गया, उसकी रडार ट्रैकिंग के आधार पर पड़ोसी देश जापान के तटीय इलाकों और प्रशासनिक क्षेत्रों में तुरंत उच्च स्तरीय इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया, ताकि आम नागरिकों को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके। इस ताजा मिसाइल परीक्षण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक चेतावनियों को दरकिनार करते हुए लगातार अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।

उत्तर कोरिया का ताजा मिसाइल परीक्षण और सियोल के साथ बढ़ता सामरिक तनाव

दक्षिण कोरियाई सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने अपने आंतरिक इलाकों से एक अज्ञात प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइल को पूर्वी सागर (जिसे सी ऑफ जापान भी कहा जाता है) की तरफ दागा। यह प्रक्षेपण ऐसे समय में किया गया है जब कोरियाई प्रायद्वीप में पिछले कुछ महीनों से सैन्य अभ्यास, जासूसी उपग्रहों के प्रक्षेपण और राजनीतिक बयानों के कारण तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। दक्षिण कोरिया की मौजूदा सरकार और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बीच कूटनीतिक संवाद के रास्ते पूरी तरह से बंद हो चुके हैं, और दोनों देश एक-दूसरे को खुली चेतावनी दे रहे हैं। प्योंगयांग का यह ताजा मिसाइल परीक्षण इस बात का स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी सैन्य ताकत के बल पर सियोल और उसके मुख्य सहयोगी अमेरिका पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहता है। उत्तर कोरियाई मीडिया और वहां के शासक लगातार यह दावा करते आए हैं कि उनकी सेना किसी भी बाहरी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है, और इस प्रकार के मिसाइल परीक्षण उनकी रक्षात्मक तैयारियों का एक हिस्सा हैं। हालांकि, रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के लगातार और उकसावे वाले कदम क्षेत्र में किसी भी दुर्घटना या युद्ध की संभावना को और अधिक प्रबल कर रहे हैं, जिससे पूरे एशियाई महाद्वीप की सुरक्षा व्यवस्था खतरे में पड़ गई है।

जापान में जारी हुआ इमरजेंसी अलर्ट और क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों की हाई-अलर्ट स्थिति

उत्तर कोरिया द्वारा दागी गई इस बैलिस्टिक मिसाइल के उड़ान मार्ग (Trajectory) को देखते हुए जापान सरकार ने अत्यधिक सतर्कता बरतते हुए अपने उत्तरी और पश्चिमी प्रांतों में तुरंत आपातकालीन चेतावनी प्रणाली (Emergency Alert System) को सक्रिय कर दिया। जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय ने देश के नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें सुरक्षित स्थानों या पक्के मकानों के भीतर रहने की सलाह दी, क्योंकि मिसाइल के मलबे या उसके संभावित प्रभाव से जापानी समुद्री सीमा के पास खतरा उत्पन्न हो सकता था। जापान का तटीय रक्षक बल (Japan Coast Guard) और नौसेना के युद्धपोत इस समय पूरी तरह से मुस्तैद हैं और वे समुद्र में गिरी मिसाइल के हिस्सों की तलाश तथा फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए अभियान चला रहे हैं। तोक्यो प्रशासन ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन करार दिया है। जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते के तहत इस ताजा हमले के बाद तुरंत उच्च स्तरीय खुफिया बैठकें शुरू हो चुकी हैं, जिनमें उत्तर कोरिया के इस खतरनाक रवैये का कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर ठोस जवाब देने की रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक चेतावनियों के बावजूद प्योंगयांग की जिद

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तमाम कड़े प्रतिबंधों, आर्थिक पाबंदियों और वैश्विक समुदाय की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी तानाशाही नीतियों से पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा है। किम जोंग उन प्रशासन अपनी अर्थव्यवस्था के बदतर हालातों और अपने नागरिकों की बुनियादी जरूरतों की उपेक्षा करके अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लगातार फंड कर रहा है। प्योंगयांग का यह मानना है कि केवल परमाणु और आधुनिक मिसाइल संपन्न राष्ट्र बनकर ही वह अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के किसी भी संभावित हमले से खुद को सुरक्षित रख सकता है। यही कारण है कि वह साल-दर-साल नई तकनीकों से लैस इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) और हाइपरसोनिक हथियारों का परीक्षण कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया को रूस और कुछ अन्य देशों से परदे के पीछे से मिलने वाले कूटनीतिक और तकनीकी समर्थन के कारण उसका हौसला और अधिक बढ़ गया है। जब भी पश्चिमी देश यूक्रेन या अन्य वैश्विक मुद्दों में उलझे होते हैं, उत्तर कोरिया इस प्रकार की उकसाने वाली हरकतें करके दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास करता है। इस ताजा मिसाइल हमले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कूटनीतिक वार्ताओं और प्रतिबंधों का उत्तर कोरिया पर अब कोई असर नहीं हो रहा है, और वह क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बिगाड़ने पर आमादा है।

भविष्य के खतरे और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की अनिश्चित राह

सियोल की ओर मिसाइल दागने की इस घटना के बाद दक्षिण कोरियाई सशस्त्र बलों को भी पूरी तरह से हाई-अलर्ट पर रख दिया गया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सैन्य अभ्यास तेज कर दिए गए हैं। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा, और यदि उत्तर कोरिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिका ने भी एक बार फिर अपनी 'लौह जैसी प्रतिबद्धता' (Ironclad Commitment) दोहराते हुए कहा है कि वह दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के लिए अपनी परमाणु छतरी (Nuclear Umbrella) का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। इन तमाम महाशक्तियों के बीच पिस रहे कोरियाई प्रायद्वीप के आम नागरिक एक स्थायी युद्ध के साये में जीने को मजबूर हैं, क्योंकि दोनों तरफ से लगातार बढ़ाई जा रही सैन्य आक्रामकता किसी भी दिन एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकती है। इस प्रकार, उत्तर कोरिया का यह ताजा बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है, जिस पर काबू पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जल्द ही कोई कड़ा और प्रभावी कदम उठाना होगा।