Nepal Political Crisis: गणेश नेपाली के आत्मदाह से दहला नेपाल, सड़कों पर उतरी आक्रोशित 'Gen Z'

Nepal Political Crisis: गणेश नेपाली के आत्मदाह से दहला नेपाल, सड़कों पर उतरी आक्रोशित 'Gen Z'

नेपाल की राजधानी काठमांडू इस वक्त एक बड़े और अभूतपूर्व जन-आक्रोश की आग में जल रही है। महज चार महीने पहले देश की युवा आबादी यानी 'जेन-जी' (Gen Z) के बंपर और ऐतिहासिक समर्थन से सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) अब अपने कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से घिर गए हैं। कर्ज के भारी दबाव और पुलिस व सिस्टम की बेरुखी से तंग आकर 25 वर्षीय दलित युवक गणेश नेपाली द्वारा सरेआम खुद को आग के हवाले (आत्मदाह) करने की दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। काठमांडू की सड़कों पर उमड़े युवाओं के इस उग्र सैलाब और बढ़ते बवाल को देखते हुए नेपाल सरकार को चल रहे संसद सत्र तक को आनन-फानन में स्थगित करना पड़ा है। विपक्ष अब पीएम बालेन शाह के सिग्नेचर लुक पर तंज कसते हुए उनका 'काला चश्मा' उतारने की मांग कर रहा है।

रोजी-रोटी छीनने पर सिस्टम के खिलाफ आत्मदाह: 60% झुलसे गणेश ने अस्पताल में तोड़ा दम

दिल दहला देने वाली यह दुखद घटना 10 जुलाई 2026 की है। नेपाल के बेहद पिछड़े और सीमांत इलाके 'मुगु' का रहने वाला गणेश नेपाली काठमांडू में एक राइड-शेयरिंग ऐप के लिए बाइक चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। काठमांडू में पासपोर्ट विभाग के बाहर कथित तौर पर रास्ता अवरुद्ध करने के आरोप में ट्रैफिक पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल के पहियों पर क्लैंप लगा दिया और गाड़ी जब्त कर ली। मोटरसाइकिल ही गणेश की आजीविका का इकलौता सहारा थी, जिसे उसने भारी कर्ज लेकर खरीदा था और उसकी अगली बैंक किस्त की तारीख बेहद नजदीक थी। गाड़ी छुड़ाने को लेकर उसकी वहां मौजूद अधिकारियों से तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस की इस कठोर कार्रवाई से बुरी तरह टूट चुके गणेश ने मानसिक तनाव में आकर अपनी ही बाइक से पेट्रोल निकाला, खुद पर छिड़का और माचिस लगा ली। 60 प्रतिशत से ज्यादा झुलस चुके गणेश को तुरंत काठमांडू के एक शीर्ष अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया।

सपनों का अंत और गरीबी का दंश: विदेश जाने की चाहत में थमा जीवन

गणेश और उसका बड़ा भाई मदन नेपाली दोनों दलित समुदाय से आते हैं। मदन के पास सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री होने के बावजूद काठमांडू की बेरुखी के कारण वह मजदूरी करने पर मजबूर है। उनके बुजुर्ग माता-पिता मुगु गांव में सीमांत किसान हैं और मामूली सरकारी पेंशन पर निर्भर हैं। मदन ने बताया कि गणेश ने इस उम्मीद में बाइक लोन पर ली थी कि वह कुछ पैसे जोड़कर अपने भाई के साथ खाड़ी देशों, जापान या दक्षिण कोरिया जाकर काम कर सकेगा और परिवार को गरीबी से बाहर निकालेगा। लेकिन पुलिस द्वारा उसकी आजीविका के साधन को सीज किए जाने के बाद उसे बैंक की किस्त चुकाने और अपनी गर्भवती पत्नी का खर्च उठाने का कोई रास्ता नजर नहीं आया, जिसने उसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

बैकफुट पर आई बालेन शाह सरकार: गृह मंत्री ने खुद जाकर सौंपा नागरिकता प्रमाण पत्र

गणेश नेपाली की मौत के बाद काठमांडू का माहौल पूरी तरह बेकाबू हो गया, जिसने पहले से चल रहे सरकार विरोधी आंदोलनों में घी का काम किया। जब गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने विपक्ष पर इस दुखद मौत पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया, तो जनता का गुस्सा और भड़क गया। हालात को हाथ से निकलता देख प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार तुरंत बैकफुट पर आ गई और भारी डैमेज कंट्रोल शुरू किया। सरकार ने मृतक गणेश की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी एकमाया परियार (जो खुद आईटी में डिप्लोमा धारक हैं) के लिए तत्काल सरकारी नौकरी और उनकी 2 साल की मासूम बेटी की पूरी शिक्षा का खर्च उठाने का आधिकारिक ऐलान किया है। एकमाया के पास नेपाल का 'नागरिकता प्रमाण पत्र' नहीं था, जिसे गृह मंत्री गुरुंग ने खुद उनके घर जाकर सौंपा ताकि उन्हें सरकारी वित्तीय राहत मिल सके। इसके साथ ही, इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए डीआईजी (DIG) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है और सरकार गणेश को "शहीद" का दर्जा देने पर भी विचार कर रही है।

सिर्फ एक मौत नहीं, सरकार के इन तीन फैसलों के खिलाफ उबल रहा था बारूद

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, गणेश की मौत तो महज एक तात्कालिक चिंगारी थी, असल में नेपाल की जनता और 'Gen Z' वोटर्स के भीतर सरकार के कुछ तानाशाही फैसलों के खिलाफ लंबे समय से बारूद इकट्ठा हो रहा था। पीएम बालेन शाह के तीन मुख्य कदमों ने जनता को सबसे ज्यादा नाराज किया है:

  • ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों को भंग करना: सरकार ने युवाओं और मजदूरों की आवाज उठाने वाले प्रमुख संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया।

  • अध्यादेश राज: लोकतांत्रिक बहस और संसद को पूरी तरह दरकिनार करते हुए सीधे अध्यादेश (Ordinance) पास करने की नीति अपनाई।

  • अतिक्रमण विरोधी अभियान (Demolition Drive): अप्रैल 2026 में काठमांडू में चलाए गए क्रूर बुलडोजर एक्शन के कारण हजारों गरीब और रेहड़ी-पटरी वाले लोग रातों-रात बेघर हो गए।

सोमवार को जब प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के घाट पर गणेश का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां मुगु से आए उसके रोते बिलखते माता-पिता के साथ-साथ इस डिमोलिशन ड्राइव में बेघर हुए सैकड़ों पीड़ित परिवार भी एकजुट हुए। फिलहाल, सरकार प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए लगातार बातचीत की मेज पर बुला रही है और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव ने 50,000 से अधिक संविदा कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की भावुक अपील करते हुए नौकरी सुरक्षा का भरोसा दिया है।

 

Latest Posts